मुम्बई के प्रसिद्ध सूफी गायक हंसराज हंस ने अपने गीतों की प्रस्तुति से चित्रकूट के दर्शकों को किया भाव विभोर

दिंनाक: 27 Oct 2018 15:47:54


भोपाल(विसंके). संस्कृति संचालनालय म.प्र. द्वारा जिला प्रशासन सतना, दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट में चल रहे तीन दिवसीय शरदोत्सव के मंचीय कार्यक्रम की शुरूआत राष्ट्रऋषि नाना जी के चित्र के समक्ष सामूहिक रूप से जगद्गुरू रोहिणीश्वर प्रपन्नाचार्य जी महाराज पुरानी लंका, श्री महंत राजकुमार दास पंजाबी भगवान आश्रम चित्रकूट, श्रीमहंत रामकृष्ण दास महाराज वेदान्ती आश्रम, महंत आनन्द जी महाराज कबीर आश्रम, श्रीमहंत रामप्यारे शरण फलाहारी आश्रम एवं श्रीमहंत वरूण प्रपन्नाचार्य बड़ामठ चित्रकूट ने दीप प्रज्जवलन के साथ किया।


इस अवसर पर सद्गुरू सेवा संघ ट्रष्ट के डॉ. वी.के. जैन, श्रीमती ऊषा जैन, अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के गोपाल भाई, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, डी.आर.आई. प्रबन्ध समिति के सदस्य वीरेन्द्र चतुर्वेदी, पूर्व सांसद सीधी गोविन्द मिश्रा, राजकुमार शिवहरे पूर्व विधायक बांदा, उपस्थित रहे।

मंचीय कार्यक्रम के शुरूआत में उपस्थित विशाल जन समूह का मार्गदर्शन करते हुए श्रीमहंत रामकृष्णदास महाराज बेदान्ती आश्रम ने कहा कि प्रभु श्रीराम की भूमि चित्रकूट में नानाजी का कार्य मानव सेवा के लिय समर्पित रहा है। उन्होंने प्रभु श्रीराम की परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। आज शरदोत्सव स्थल पर विशाल जन समूह देखकर यह लगता है कि राष्टऋषि नानाजी के कार्यों की बराबरी दुनिया में कोई नहीं कर सकता।

 
शरदोत्सव की समापन संध्या में मुम्बई के प्रसिद्ध सूफी गायक पद्मश्री हंसराज हंस ने अपने गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को भाव विभोर किया। उन्होंने अपने अंदाज में गायन का ऐसा जादू चलाया कि लोग गुलाबी ठंड और भींगी-भीगी ओस के बीच में देर रात्रि तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।


शरदोत्सव मंच पर आने के बाद पाश्र्व गायक हंसराज हंस ने सर्वप्रथम राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि अर्पित कर नानाजी के मार्गों को देश-दुनिया के लिए अद्वितीय बताया। हंसराज हंस ने अपने गायन का शुभारम्भ जिंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना, दिल चोरी हो गया साडा, क्या करिये क्या करिये, अखियां लड़ी मेरी बीच बजार, दिल मेरा लुट गया पहली बार एवं दिल तोते-तोते हो गया जब एक के बाद एक गाये गये तो पब्लिक थम सी गई और सभी लोगों की नजर मंच पर तथा कान साउण्ड की तरफ हो गये। लगातार दो घंटे तक लोगों की फरमाईस पर गाते हुए लोगों को खूब रिझाया। हंसराज हंस ने गायन के बारे में बोलते हुए कहा कि गीतों को आज देखने की परम्परा है जब कि गायन सिर्फ सुना जाता है। शरदोत्सव के समापन पर संगीत का आनन्द लेने के लिये बहुत बड़ी तादाद में जन सैलाब उपस्थित रहा। फतेहपुर, झांसी, इलाहाबाद, बांदा, कर्वी सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा आदि जिलों से तमाम लोगों का हुजूम शरदोत्सव देखने के लिये चित्रकूट आया।

 

प्रसिद्ध गायकों ने शरदोत्सव में छोड़ी अमिट छाप


राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख के जन्मोत्सव से प्रारम्भ हुए तीन दिनी शरदोत्सव में अब तक देशभर के अनेक ख्याति प्राप्त कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियां देकर शरदोत्सव को अविस्मरणीय बना चुके है। प्रमुख रूप से अब तक प्रसिद्ध गायक अनुराधा पौडवाल, रवीन्द्र जैन, सुरेश वाडेकर, मनोज तिवारी, पवन तिवारी, विनोद राठौर, कैलाश खैर, नितिन मुकेश, प्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा एवं नृत्यांगना डोना गांगुली, सुधा चन्द्रन, डिम्पल डिप्युटी शाह, ग्रेसी सिंह, मोहित चैहान, सुदेश भोसले, अभिजीत भट्टाचार्य की प्रस्तुतियों ने शरदोत्सव को ऐतिहासिक बनाने में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।