64 वीं राष्ट्रीय शालेय फील्ड आर्चरी प्रतियोगिता का शुभारंभ सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में किया गया

दिंनाक: 13 Nov 2018 17:08:55


भोपाल(विसंके). 64वीं राष्ट्रीय शालेय फील्ड आर्चरी प्रतियोगिता का शुभारंभ आज सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में किया गया , इस प्रतियोगता के शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्याभारती, अध्यक्षता डॉ. प्रकाश बरतुनिया कुलाधिपति  बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ , विशिष्ट अतिथि श्रीराम जी अरावकर राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री विद्याभारती रहे ।


प्रतियोगिता समारोह का उद्घाटन मंचस्थ अतिथियों द्वारा ध्वजारोहण ,दीप प्रज्जलित कर माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर सरस्वती वंदना से किया गया ।

 अतिथियों का परिचय श्री पवन शर्मा प्राचार्य सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय के द्वारा और अतिथियों का स्वागत श्री अवधेश त्यागी विभाग समन्वयक ग्वालियर विभाग विद्या भारती मध्यभारत प्रांत एवं श्री मनीष   वाजपेई सह क्षेत्र प्रमुख विद्याभारती मध्य क्षेत्र द्वारा तिलक लगाकर एवं शाल श्रीफल भेंटकर किया गया । एस जी एफ आई प्रतियोगिता की भूमिका श्री सोमदत्त दीक्षित सी पी आई ओ ऑफिसर दिल्ली एस जी एफ आई फील्ड आर्चरी ऑब्जर्वर ने कहा कि यह खेल प्रतिवर्ष लगभग सत्तर हजार बच्चे खेलते हैं तीन सालों में 250 से अधिक गोल्ड मेडल प्राप्त किए हैं विश्व स्तर पर आगे और अच्छे परिणाम देंगें , विद्याभारती को एक राज्य के रूप में दर्जा प्राप्त है यह एक बड़ी उपलब्धि है जिसके अंतर्गत तीरंदाजी की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में आयोजित की जा रही है ।


समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ गोविन्द प्रसाद शर्मा जी ने कहा कि यदि खेलों के बारे में कहा जाए तो विश्वभर के लोग मानते हैं कि मनुष्य ने भाषा को बाद में पहले खेल सीखा बच्चा जन्म के समय से ही खेलना प्रारम्भ कर देता है तीरंदाजी प्राचीन विधाओ में से एक है जिसमें चित्त की एकाग्रता प्रमुख है महाभारत में अर्जुन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि चित्त को एकाग्रचित्त नहीं किया तो स्थिरता नहीं हो सकती है इसलिए सभी प्रतिभागियों को भी अर्जुन की भांति एकाग्रचित्त हो केवल अपने लक्ष्य को ध्यान रखना चाहिए ।



अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ प्रकाश बरतुनिया ने कहा कि  कोई भी क्षेत्र हो  हमें अपने लक्ष्य को ध्यानपूर्वक रखकर राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के प्रतिबंध होना चाहिए और इसके लिए जीवन में खेल अतिआवश्यक हैं इसके माध्यम से हम एक दूसरे से रूबरू होते हैं और भाईचारा विकसित होता है खेलों में जीत हार का कोई महत्व नहीं है खिलाड़ी बड़े विशाल हृदय के होते हैं पृथ्वी राज चैहान कितने बड़े तीरंदाज थे कि बिना आँखों के ही अपने लक्ष्य पर तीर मारते हुए उसे प्राप्त करने में सक्षम थे भारत ने ही विश्व को यह विधा सिखाई ।

 प्रतियगिता प्रारम्भ की घोषणा श्री राजेन्द्र सिंह जी खेल निर्देशक जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा की गई , भैया हर्षवर्धन सिंह परमार ने सभी प्रतिभागियों को  निष्ठापूर्वक खेल की शपथ दिलाई ।

इस राष्ट्रीय फील्ड आर्चरी प्रतियोगिता में 13 राज्यों जिनमें विद्याभारती, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली , उड़ीसा, गुजरात, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, डी ए वी कॉलेज मैनेजिंग  कमेटी, सी बी एस ई वेलफेयर स्पोर्ट्स ऑर्गनाइजेसन से तीनों वर्गों के लगभग 342 बालक, 278 बालिका एवं 130 कोच एवं मैनेजर्स उपस्थित रहे ।

यह प्रतियगिता 13 से 17 नवम्बर तक चलने वाली है जिसमें देश भर से आए तीरंदाज लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निशाने साधेंगे ।

इस उद्घाटन समारोह में श्री हितानंद शर्मा प्रांतीय संगठन मंत्री विद्याभारती मध्य भारत प्रांत, श्री आनंद दीक्षित श्री सुभाष नायर, सहित विभिन्न राज्यों से आए तीरंदाज, अभिभावक, कोच, मैनेजर, निर्णायक, गणमान्य नागरिक, आचार्य परिवार एवं पत्रकार उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमति श्वेता श्रीवास्तव सरस्वती शिशु वाटिका प्रधानाचार्य एवं आभार  प्रदर्शन श्री शिरोमणि दुबे उपाध्यक्ष सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान द्वारा किया गया ।