64वीं राष्ट्रीय शालेय फील्ड तीरंदाजी प्रतियोगिता का शुभारंभ

दिंनाक: 14 Nov 2018 18:21:38

विश्व संवाद केंद्र के लिए सुनील साहू की रिपोर्ट

सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में 5 दिन तक 13 राज्यों के प्रतिभागी साधेंगे निशाना


भोपाल(विसंके). 64वीं राष्ट्रीय शालेय फील्ड आर्चेरी (तीरंदाजी) प्रतियोगिता का आयोजन 13 से 17 नवम्बर तक सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, शिवपुरी में किया जा रहा है। प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उड़ीसा, गुजरात, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश समेत कुल 13 राज्यों के प्रतिभागी शामिल होंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा ने तीरंदाजी का महत्व बताते हुए कहा कि धनुर्विद्या प्राचीन विधाओ में से एक है जिसमें चित्त की एकाग्रता प्रमुख है। महाभारत में अर्जुन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि चित्त को एकाग्रचित्त नहीं किया तो स्थिरता नहीं हो सकती। इसलिए सभी प्रतिभागियों को भी अर्जुन की भांति एकाग्रचित्त हो केवल अपने लक्ष्य को ध्यान रखना चाहिए।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति डॉ. प्रकाश सी. बरतूनिया ने कहा कि कोई भी क्षेत्र हो हमें अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। इसके लिए जीवन में खेल अतिआवश्यक हैं इसके माध्यम से हम एक-दूसरे से रूबरू होते हैं और भाईचारा विकसित होता है। खेलों में जीत-हार का महत्व ही बङा नहीं होता। खिलाड़ियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह विशाल हृदय के हैं। पृथ्वीराज चौहान तीरंदाजी में बहुत निपुण थे। वह न केवल देखकर निशाना लगाते थे बल्कि आवाज सुनकर भी अपने लक्ष्य पर तीर मारते हुए उसे प्राप्त करने में सक्षम थे। भारत ने ही विश्व को यह विधा सिखाई।


प्रतियोगिता की भूमिका को बताते हुए एस.जी.एफ.आई फील्ड आर्चेरी ऑब्जर्वर सोमदत्त दीक्षित ने कहा कि यह खेल प्रतिवर्ष लगभग 70 हजार बच्चे खेलते हैं। तीन सालों में 250 से अधिक गोल्ड मेडल प्राप्त किए हैं। विश्व स्तर पर आगे और अच्छे परिणाम आयेंगे। विद्याभारती को एक राज्य के रूप में दर्जा प्राप्त है यह एक बड़ी उपलब्धि है।


इस अवसर पर विद्या भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री हितानंद शर्मा, विभाग समन्वयक अवधेश त्यागी, सह क्षेत्र प्रमुख मनीष बाजपाई, आनंद दीक्षित, सुभाष नायर, विद्यालय के प्राचार्य पवन शर्मा, गणमान्य नागरिक, अभिभावक, प्रबंधक, आचार्यगण विभिन्न राज्यों के प्रतिभागी, कोच एवं निर्णायक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सरस्वती शिशु वाटिका की प्रधानाचार्य श्वेता श्रीवास्तव एवं आभार प्रदर्शन सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान की उपाध्यक्ष शिरोमणि दुबे ने किया। इससे पूर्व प्रतियोगिता प्रारम्भ की घोषणा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के खेल निदेशक राजेंद्र सिंह ने की और हर्षवर्धन परमार ने सभी प्रतिभागियों को निष्ठापूर्वक खेल की शपथ दिलाई।