आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 21 Nov 2018 13:18:07


पंथ, सम्प्रदाय, मजहब अनेक हो सकते हैं,  किन्तु धर्म तो एक ही होता है | यदि पंथ- सम्प्रदाय उस एक ईश्वर की उपासना के लिए प्रेरणा देते हैं तो ठीक है |
अन्यथा शक्ति का बाना पहनकर सांप्रदायिकता को बढ़ावा देना  न धर्म है और न ही ईश्वर भक्ति
है |

- शहीद भगत सिंह