आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 27 Nov 2018 16:07:32


रस्सी की अज्ञानता के कारण रस्सी सांप प्रतीत होता है; स्वयं की अज्ञानता के कारण क्षणिक स्थिति भी स्वयं का व्यक्तिगत, सीमित, अभूतपूर्व स्वरूप प्रतीत होती है.


-   श्री गुरुनानक देव