आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 14 Dec 2018 13:52:20


जो पदार्थ जैसा है, उसे वैसा ही कहना, लिखना और मानना सत्य कहलाता है | जो पदार्थ सत्य है उसके गुण, कर्म और स्वभाव भी सत्य होते हैं, जो मनुष्य पक्षपाती होता है, वह अपने असत्य को भी सत्य और विरोधी मत वाले के सत्य को भी असत्य सिद्ध करने में प्रवृत्त होता है | इसलिए वह सत्य मत को प्राप्त नहीं हो सकता |


- स्वामी दयानंद सरस्वती