आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 17 Dec 2018 15:55:16


संस्कार ही 'मानव' के 'आचरण' की नीव होता है, जितने गहरे 'संस्कार' होते हैं, उतना ही 'अडिग' मनुष्य अपने कर्तव्य, धर्म, सत्य और न्याय पर होता है।

- स्वामी दयानंद सरस्वती