भारत भारती में प्रारम्भ हुआ त्रिदिवसीय प्रान्तीय अनुभूति शिविर

दिंनाक: 25 Dec 2018 19:02:38


विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा चलाये जा रहे सरस्वती शिशु मन्दिरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा जाता है । महानगरीय जीवन शैली में रह रहे छात्रों को ग्राम्य व जनजाति जीवन शैली की अनुभूति कराने तथा समाज के प्रति संवेदना जगाने के लिए एक त्रिदिवसीयअनुभूति शिविर का भारत भारती आवासीय विद्यालय जामठी में आयोजन किया गया है जिसमे मध्यभारत प्रांत के 30 नगरीय विद्यालयों के छात्र संसद के पदाधिकारी छात्र भाग ले रहे हैं । 


 जिसका आज विधिवत उद्घाटन संघ के प्रान्त प्रचारक श्री अशोक पोरवाल, विद्या भारती के प्रांत संगठन मंत्री श्री हितानन्द  शर्मा, प्रांत उपाध्यक्ष श्री शिरोमणि दुबे ने उद्घघाटन माँ सरस्वती और भारत माता के चित्र पूजन कर शुभारम्भ किया । 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक श्री अशोक पोरवाल ने शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए कहा भारत गाँवों का देश है, हमारे रोजमर्रा के जीवन मे प्रयोग में आने अधिकांश चीजें गांवों से आती है । अन्न, सब्जियाँ फल आदि गाँवों में खेतों में पैदा होती है । गाँवों में शहरों जैसी सुविधाएं नहीं हैं, फिर भी ग्रामीण जन मिलजुलकर रहते हैं । अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति एक दूसरे के सहयोग से करते हैं । 
श्री पोरवाल ने कहा कि नगर ग्राम या वन में रहने वाले हम सभी भारत माता की संतानें हैं । सभी हमारे भाई बहिन हैं । यह अनुभूति कार्यक्रम समाज के प्रति हमारी संवेदना जगाने के लिए है ।
प्रतिष्ठान के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री शिरोमणि दुबे ने इस अवसर पर कहा कि हम सौभाग्यशाली है कि हमारा जन्म भारत मे हुआ है । हम अपने छात्र जीवन मे अपने भारत को जाने । भारत केवल महानगरों की चकाचौंध नहीं अपितु वे लाखों गाँव भी है जहाँ लोग प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण कर उसके बीच मे रहते हैं । जीवन में बड़ा आदमी बनकर केवल सफल होना नहीं अपितु जीवन की सार्थकता अपने समाज और देश के लिए जीना है ।
प्रान्त संगठन मंत्री श्री हितानन्द शर्मा ने अनुभूति शिविर की योजना के बारे में छात्रों को बताया कि यह हमारे जीवन के लिए एक विशिष्ट अनुभव होगा । देश की दो तिहाई आबादी गाँवों में रहती है । अगर हमें भारत को समझना है तो गाँवों को समझना होगा ।
भारत भारती के सचिव मोहन नागर ने शिविरार्थियों को बैतूल जिले के इतिहास, भूगोल, पुरातत्व, पर्यावरण से परिचित कराते हुए बताया कि बैतूल जिला अखण्ड भारत का केंद्र बिन्दु है । यहाँ की धरती का पानी पूर्व और पश्चिम के दोनों सागरों में जाता है । बैतूल के सामरिक महत्व के किलों, गोंड राजाओं के शौर्य तथा खेड़ला किला पर मुकुन्द स्वामी द्वारा रचित मराठी के आद्य ग्रंथ विवेक सिंधु जी जानकारी दी गई । श्री नागर ने बैतूल जिले की जीवनदायिनी नदी माँ ताप्ती की महिमा भी छात्रों को बताई ।
प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री जे. काशीपति ने छात्रों से दिनचर्या के अनुभव सुने । छात्रों भारत भारती परिसर में चलने वाले प्रकल्प के बारे में बताया । जैविक कृषि, जल प्रबंधन, सौर ऊर्जा यंत्र छात्रों को सबसे अधिक पसंद आये । श्री


प्रथम दिवस विद्यार्थियों ने भारत भारती आवासीय विद्यालय में चलने वाले प्रकल्प छात्रावास, चिकित्सालय, आईटीआई, जैविक कृषि, गौशाला, जल प्रबंधन तथा कचरा प्रबंधन के प्रयोग देखे । दिन भर चले अलग-अलग सत्रों में छात्रों ने अपने अनुभव सुनाये । 

इस शिविर में छात्रों के साथ विद्या भारती के नगरीय शिक्षा के प्रांत प्रमुख राम भावसार, ग्रामीण शिक्षा प्रमुख श्री रूपेश विश्वकर्मा सहित तीस संरक्षक आचार्य, विद्या भारती के प्रान्तीय और अखिल भारतीय अधिकारी भी सम्मिलित है जो छात्रों के बीच रहकर उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं । आज सभी छात्र बैतूल जिले पन्द्रह जनजाति ग्रामों में ग्राम दर्शन कर ग्रामीणों से संवाद करेंगे व ग्रामीण जन जीवन की कला सीखेंगे ।