सकारात्मक ऊर्जा जब शब्दों में ढलती है तब साहित्य का जन्म होता है :- कटनी पुस्तक मेला

दिंनाक: 25 Dec 2018 18:38:26


भोपाल(विसंके). "साहित्यकार आत्मा का इंजीनियर होता है सकारात्मक ऊर्जा जब शब्दों में ढलती है तब साहित्य का जन्म होता है साहित्य का लक्ष्य है मन शांती व समाज का निर्माण समाज में रहने वाले लोग यदि अपनी आंचलिक गोलियों को सुनकर भाव विभोर नहीं होते हैं तो उनका हृदय उस बंजर धरती की तरह की है जिस पर ना तो कुछ हो सकता है ना कुछ पनप सकता है "उक्त उद्गार पुस्तक मेले के साहित्य महोत्सव में विशिष्ट अतिथि  के रूप में पधारे राष्ट्रीय साहित्यकार श्री श्याम सुंदर दुबे जी ने अपने उद्बोधन में व्यक्त किए .


"अध्ययन से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है सरस्वती और लक्ष्मी के बीच की दूरी को अध्ययन से ही कम किया जा सकता है विश्व का सर्वोत्तम साहित्य भारत में ही रचा गया है पढ़कर और अनुभव कर लिखा गया साहित्य ही समाज को दिशा प्रदान कर सकता है आदर्श समाज का गठन आदर्श साहित्य से ही हो सकता है" उक्त उद्गार कार्यक्रम में पधारे मुख्य वक्ता डॉ श्रीकांत मैं अपने उद्बोधन में व्यक्ति किया .

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शरद अग्रवाल जी ने कहा कि हर वर्ष इस तरह के आयोजन होने चाहिए और इस कार्यक्रम का प्रचार प्रसार अधिक से अधिक हो सके और समाज की सहभागिता बढ़ सके इसलिए साहित्यिक शोभायात्रा निकालना चाहिए जिसमें साहित्य जगत के एवं समाज के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेवे


कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विश्व प्रसिद्ध "इशुरी" पुस्तक की समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र दुबे एवं सतीश आनंद द्वारा की गई. एवं पुस्तक के लेखक श्री श्याम सुंदर दुबे जीने अपनी बात रखते हुए आंचलिक साहित्य और गोलियों के विलुप्त होने की खतरे की तरफ समाज का और साहित्य का ध्यान आकर्षित करने के प्रयत्नों पर बल दिया उद्बोधन में आगे अपनी बात रखते हुए साहित्यकारों ने कहा जब प्रेम की पराकाष्ठा होती है तब राधा और कृष्ण का निर्माण होता है और साधना तथा लेखन की पराकाष्ठा होती है तब ईसुरी नामक पुस्तक की रचना होती है


कार्यक्रम के अगले सत्र में जबलपुर, दमोह, पन्ना ,छतरपुर, रीवा ,सतना ,कटनी ,नागोद ,भोपाल ,छत्तीसगढ़ आदि अंचलों से पधारे हुए साहित्यकारों ने काव्य पाठ किया।

सायं कालीन सत्र में विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ शिवनाथ बिहारी द्वारा सैकड़ों बच्चों को पढ़ने में आने वाली कठिनाइयों से किस तरह मुक्ति पाई जा सकती है इस पर फ्री वर्कशॉप दी गई ।

पुस्तक मेले के पांचवे दिवस साहित्य महोत्सव का समापन कार्यक्रम आयोजित किया जाना है जिसमें की भोपाल एवं प्रदेश के अन्य जिलों से ऐतिहासिक एवं वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा साहित्य के विभिन्न विषयों पर परिचर्चा का आयोजन किया जावेगा साथ ही शाय कालीन बच्चों को पुनः शिवनाथ बिहारी द्वारा निशुल्क वर्कशॉप प्रदान की जावेगी पुस्तक मेला समिति के समस्त सदस्यों द्वारा नगर की जनता से अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम में सपरिवार पधारने का विनम्र आग्रह किया है