जेहादियों की मार से अब तो धर्मनिरपेक्षतावादी भी असुरक्षित - राजेश पाठक

दिंनाक: 28 Dec 2018 15:52:30

रोहिंग्या मुसलमानों की देश के अंदर घुसपेठ के दौरान जब देश के अंदर एक वर्ग उनके प्रति सहानुभूति दिखाने में लगा हुआ था, तभी अमेंस्टी इंटरनेशनल के हवाले से  खबर आयी थी की यही रोहिंग्या कभी मयन्मार में जेहादियों की रहनुमायी में  हिन्दुओं के कत्लेआम को अंजाम देने में लगे हुए थे, और जिसके परिणाम स्वरुप आज उन्हें वहाँ की जनता एकजुट हो देश के बाहर खदेड़ने के लिए बाध्य हो उठी  है. इस रिपोर्ट के आने के बाद भी देश में कई नसरुद्दीन शाह जैसे बुद्धिजीवी कहते फिर रहे थे कि मानवता के नाते रोहिंग्याओं को देश से नहीं निकाला  जाना चाहिए, क्योंकि भारत उनके लिए सबसे सुरक्षित जगह है. पर अब इन्ही नसरुद्दीन शाह को भारत अपने बच्चों के लिये असुरक्षित लग रहा है. उनके इस बयान से ‘धर्मनिरपेक्षतावादी’ खुश तो बहुत हुए होंगे , पर यदि वो थोड़ा गौर से विचार करते तो उन्हें पता चल जाता कि आखिर देश में कौन किससे के कारण असुरक्षित है. वैसे आज वास्तव में तो केरल और पश्चिम बंगाल जैसी जगहों पर अब तो ये ‘धर्मनिरपेक्षतावादी’ भी अपने आप को  असुरक्षित महसूस करने लग गए हैं. 


       आपको याद होगा केरल में एक हिन्दू लड़की हदिया का मुस्लिम लड़के के साथ निकाह का मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था. क्योंकि लड़की के पिता अशोकन ने इसे ‘लव-जिहाद’ का मामला बताया था. लेकिन कोर्ट ने हदिया का पक्ष सुनकर उसे इस्लाम के अनुसार वैवाहिक जीवन बीताने की अनुमति दे दी थी. पर अब अशोकन ने अपने ५० साथियों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. यही अशोकन कभी समर्पित कामरेड हो वामपंथ के लिए जूझ मरने  कों तैयार  रहा करता था. लेकिन लव-जिहाद के मामले में अपने दल का सहयोग मिलने के स्थान  पर जब उसे उसकी ओर से विरोध का सामना करना पड़ा तो उसे वामपंथीयों की ‘धर्मनिरपेक्षता’ के मायने समझ में आ गए.
       जहां तीन दशकों तक वामपंथीयों का शासन रहा ऐसे पश्चिम बंगाल का किस्सा तो और दिलचस्प है. प्रदेश के पूर्व और पश्चिम मिदनापुर, नदिया,उत्तरी बंगाल, उत्तरी २४ परगना जैसे इलाके जो कि बंगलादेश की सीमा से लगे हुए हैं वहाँ हाल ही में हुए उपचुनाव व पंचयत चुनावों में भाजपा का मत प्रतिशत २०१४ के १४% से बढ़कर २८% जा पहुंचा है. इसका कारण है कानून से बचकर सरंक्षण पाने के लिए बड़ी संख्या में सत्ताधारी ममता की टी.एम.सी. के समर्थक बने बंगलादेशी घुसपाठीये. पार्टी के इशारे पर इन में मौजूद जेहादी तत्व संगठित हो अब वामपंथीयों को ठिकाने लगाने में लगे हुए हैं. स्थिति तो ये है कि अपना खेत जोतना तक उनके लिए मुश्किल हो गया है. कई अपना राशन-कार्ड गवां चुके है, जिसके कारण सरकारी योजनाओं  के लाभ से वंचित हो चुके हैं. इन  परस्थितीयों में हुए हिन्दू धुर्वीकरण से भाजपा मजबूत स्थिती में आने लगी है. वामपंथीयों को भो अब अपनी सुरक्षा का एकमात्र विकल्प भाजपा की शरण में जाने में दिखने लगा है. बड़ी संख्या में हुए इस पलायन के कारण से ही आज भाजपा मजबूत होकर उभरी है.[देखें, ‘इंडिया टुडे’-१९ सितम्बर,२०१८] 
         वास्तविकता तो ये है कि अपने ही देश में जहां-जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हुआ वहाँ-वहाँ उसकी आफत ही हुई है. वैसे नसरुद्दीन शाह के समर्थन में उतरे इमरान खान को चहिये कि वो ये पहले बताएं की आज़ादी के समय पाकिस्तान में जहां हिन्दुओं की आबादी २०% थी वो अब घटकर १% से भी कम कैसे रह गई. भारत में रहने वाले अल्पसंख्यकों की वो चिंता न करे , जो कि कभी आज़ादी के समय ३% हुआ करते थे और वाही अब बढ़कर १४% हो गए है.