विश्व कल्याण का मार्ग भारत से होकर ही निकलेगा – भय्याजी जोशी

दिंनाक: 29 Dec 2018 14:53:55

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश (भय्याजी) जोशी ने कहा कि देश के विकास में आज सबसे बड़ी बाधा हीनता का भाव है. लोग दूसरे देशों या संस्कृति से खुद को हीन समझने लगे हैं. भारत को जापान, चीन अमेरिका जैसे दूसरे देशों का अनुकरण करने के बजाय भारत को भारत रहने की आवश्यकता है. देश के युवाओं में हीनता को छोड़कर संस्कृति, भाषा, विचार आदि के लिए जागरूक करने का संकल्प लेना होगा. युवा पीढ़ी को समझना होगा कि विश्व कल्याण का मार्ग भारत से होकर ही निकलेगा.

 

 

हिन्दू एक होने की बात करता है, एक जैसा होने की नहीं

 

सरकार्यवाह शनिवार को मानसरोवर स्थित संस्कृति कॉलेज सभागार में आयोजित प्रबुद्ध जन संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे. संगोष्ठी  में विभिन्न क्षेत्रों सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी, न्यायिक, प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षिक व व्यवसायिक आदि का नेतृत्व करने वाले प्रबुद्ध जन उपस्थित थे. सरकार्यवाह जी ने कहा कि देश में आज हीनभावना से ग्रस्त होने की चुनौती को दूर करने के लिए परिवार, संगठनों के साथ सभी को प्रयास करने होंगे. दुनिया में ईश्वर के रूप भिन्न हैं, लेकिन ईश्वर एक है. आज दुनिया ईश्वर के रूपों को लेकर ही संघर्ष कर रही है. जबकि हिन्दू जीवन शैली कहती है कि आपस में संघर्ष की जरूरत नहीं है, हम एक होकर चलेंगे.


यही विश्व कल्याण का मार्ग है. हमारी संस्कृति में किसी प्रकार का दुराग्रह नहीं है. शास्त्रीय मान्यता है कि संसार में जो भी बना है, वह पंचमहाभूतों से निर्मित हुआ है और उसी में विलीन हो जाएगा. पंचभूतों के बिना दुनिया में कोई भी शक्ति नहीं चल सकती है. ऐसे में इनके मूल में पूजा का भाव रहता है, न कि संघर्ष का. दुनिया ने मानव व प्रकृति को अलग अलग मानकर समस्याओं को न्यौता दिया है. भारतीय संस्कृति प्रकृति के साथ तालमेल रखते हुए चलना सिखाती है.

 

साभार:- जयपुर (विसंकें).