शिवालय हमारे प्रदेश के - महाशिवरात्री

दिंनाक: 13 Feb 2018 15:57:46

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्|

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्||

भोपाल(विसंके). प्रतिवर्ष माघ बहुल चतुर्दशी के दिन शिवरात्री मनाया जाता है. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव हर मंदिर में लिंग रूप में प्रत्यक्ष होते हैं. भक्तों का मानना है कि उस दिन शिव पूजा एवं लिंगाभिषेक करने पर शिव प्रसन्न होंगे. उस दिन उपवास रहकर रात भर जागरण कर पूजा एवं भजन करते हैं. कहा जाता है कि उस दिन स्वामी को बिल्वपत्र और अभिषेक समर्पित करने से पुनर्जन्म नहीं रहेगा ओर  मुक्ति प्राप्त होगी. इस पर्व पर शिवलिंग ज्योतिर्लिंग के रूप परिवर्तित होगा. ’महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हम आपके लिए चुन कर लायें हैं. कालों के काल महाकाल के मध्यप्रदेश स्थित प्रमुख ’शिवधाम’ जहां आपको एक बार अवश्य जाना चाहिए क्योंकि यहां भोले बाबा की अनुकम्पा कुछ खास ही है.
महाकालेश्वर (उज्जैन) 

प्राचीन भारत में ’अवन्तिका’ नाम से विख्यात इस शहर को साक्षात ’महाकाल’ का आशीर्वाद प्राप्त है. ऐसा कहा जाता है कि यह क्षेत्र धरती की ’नाभि’ में बसा हुआ है. ’महाकालेश्वर’ भगवान शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक हैं. परमपिता परमात्मा ’शिव’ यहाँ स्वयं अपनी इच्छा से अवन्तिका की रक्षा के लिए ’अवस्थित’ हुए थे. श्रावण मास को पुरी दुनिया से लाखों लोग भोले बाबा की शरण में उज्जैन आते है. मध्यकालीन इतिहासकारों के मुताबिक 1234 ई. में ’गुलामवंश’ के सुल्तान इल्तुतमिश ने आक्रमण करके इस मंदिर को क्षति पहुचाने की कोशिश की. बाद में यहां के शासकों ने इसका पुनः जीर्णोद्धार और सौन्दर्यीकरण किया.

भोजेश्वर मेंदिर (भोजपुर)

भोपाल से 32 किलोमीटर की दूरी पर ’रायसेन’ जिले में स्थित यह मंदिर ’उत्तर भारत का सोमनाथ’ कहलाता है. भोजपुर मंदिर तथा उसके शिवलिंग की स्थापना धार के प्रसिद्ध परमार राजा भोज द्वारा की गई थी. स्थानीय मान्यता के अनुसार माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण ’प्रथमतः’ पांडवों द्वारा माता कुंती की पूजा के लिए किया गया था तथा शिवलिंग को महज एक रात में निर्मित किया गया था. यह मंदिर वर्गाकार है, जिसका बाहरी विस्तार बहुत बडा है. मंदिर चार स्तंभो के सहारे पर खडा है देखने पर इसका आकार हाथी की सूंड के समान लगता है.


ओंकारेश्वर मंदिर (खंडवा)

सनातन शास्त्रों के अनुसार कोई भी तीर्थयात्री देश के भले ही सारे तीर्थ कर ले किन्तु जब तक वह पवित्र नर्मदा के तीरे स्थित ओंकारेश्वर आकर किए तीर्थों का जल लाकर शिवलिंग में अर्पित नहीं करता तब तक उसके सारे तीर्थों का पुण्य अधूरा माना जाता है. यह ’शिवलिंग’ द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक माना जाता है. ओंकारेश्वर शिवलिंग किसी मनुष्य के द्वारा गढा, तराशा या बनाया हुआ नहीं हैं. अपितु यह प्राकृतिक शिवलिंग है. इसके चहुं ओर जल भरा होता है. ’शिवलिंग’ मन्दिर के गुम्बद के नीचे भी नहीं है.
पशुपतिनाथ मंदिर (मंदसौर)

मंदसौर (मंदोदरी) के नगर में भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा की स्थापना का कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है. पूरे संसार में शिवजी के अनेकों शिवलिंग हैं लेकिन अष्टमुखी शिवलिंग यह एक मात्र ही है. शिव के आठों मुख भगवान शिव के अष्ट तत्व को दर्शाते हैं. सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं का बडा तांता लगता है. भगवान आशुतोष की कृपा से यहां भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं.