17 फरवरी / जन्मदिवस -रामकृष्ण परमहंस

दिंनाक: 17 Feb 2018 15:02:23


भोपाल(विसंके). रामकृष्ण परमहंस भारत के एक महान संत और विचारक थे. स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस ने प्रायः सभी धर्मों की एकता पर बल दिया था. रामकृष्ण परमहंस का जन्म 17 फरवरी 1836 को पश्चिम बंगाल (तत्कालीन बंगाल प्रान्त) के कामारपुकुर नामक गाँव में हुआ था. इनकी माता का नाम चंद्रमणि देवी और पिता का नाम खुदीराम था.


रामकृष्ण परमहंस को बचपन में ही विश्वास हो गया था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं. इसलिए ईश्वर की प्राप्ति के लिए निःस्वार्थ कठोर साधना और भक्ति की थी. ऐसी किम्वदंती है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिनेश्वरी कलि मंदिर में माता कली से इनका साक्षात्कार होता था.

स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे. स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से मानव जीवन से संबंधित कुछ ऐसे सवाल किए थे जिसे हर मनुष्य को जानना चाहिए.

एक बार रामकृष्ण परमहंस को दक्षिणेश्वर में पुजारी की नौकरी मिली उनका 20 रूपए वेतन तय किया गया. जो उस जमाने के समय में लिए पर्याप्त था. लेकिन 15 दिन बीते ही थे कि मंदिर कमेटी के सामने उनकी पेशी हो गई, और कैफियत देने के लिए कहा गया. दरअसल एक के बाद एक अनेक शिकायतें उनके विरूद्ध कमेटी तक जा पहुंची थीं. किसी ने कहा कि- यह कैसा पुजारी है, जो खुद चखकर भगवान को भोग लगाता है, तो किसी ने कहा- फूल सूंघकर भगवान के चरणों में अर्पित करता है. उनके पुजा के इस ढंग पर कमेटी के सदस्यों को बहुत आश्चर्य हुआ था. जब रामकृष्ण कमेटी के सामने पहुंचे तो एक सदस्य ने पुछा- यह कहां तक सच है कि तुम फूल सुंघ कर देवता पर चढाते हो. इस पर रामकृष्ण परमहंस ने सहज भाव से कहा - मैं बिना सूंघे फूल भगवान पर क्यों चढाऊँ मैं पहले देख लेता हुँ कि उस फूल से कुछ सुगंध भी आ रही है या नहीं तत्पश्चात दूसरी शिकायत रखी गई - हमने सुना है कि तुम भगवान को भोग लगाने से पहले खुद अपना भोग लगा लेते हो ?? रामकृष्ण ने पुनः सहज भाव से जवाब देते हुए कहा- जी, मैं अपना भोग तो नहीं लगाता पर मुझे अपनी मां की बात यह है कि वे भी ऐसा ही करती थीं जब काई चीज बनाती थी. तो चखकर देख लिया करती थीं और फिर मुझे खाने को देती थीं दृ उन्होंने फिर कहा - मैं भी चख कर देखता हुँ पता नहीं जो चीज किसी भक्त ने भोग के लिए लाकर रखी है या मैंने बनाई है वह भगवान को देने योग्य है या नहीं. उनका सीधे-सादे शब्दों में यह जवाब सुनकर कमेटी के सदस्य निरूत्तर हो गऐ.

साभार:- हिन्दू गर्जना