गरीबों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए: सह सर कार्यवाह- सुरेश सोनी जी

दिंनाक: 19 Feb 2018 15:43:43


भोपाल(विसंके). ऐतिहासिक रूप से आयोजित हुए हिन्दू सम्मेलन का दृश्य श्योपुर जिलेवासियों को अद्वितीय रहा। हजारों की संख्या में उमड़ी लोगों की भीड़ ने आज इस बात को स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया कि हिन्दू समाज न सिर्फ संगठित है, बल्कि समाज के लोगों में एकता भी बरकरार है। कार्यक्रम से पूर्व नगर में विशाल कलश एवं शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकाली गई। कलश यात्रा में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से आई हजारों मातृशक्ति ने भागीदारी कर आयोजन को सफल बनाया। कार्यक्रम से पूर्व मंच पर आयोजित हुए आदिवासी नृत्य और युवाओं द्वारा दी गई मनमोहक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उपस्थित हुए लोगों का मन जीत लिया। इसके बाद कार्यक्रम के अतिथि मंच पर पहुंचे, जहां युवाओं में ओलम्पिक पदक विजेता विजेन्द्र कुमार की झलक पाने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता परम पूज्य उत्तम स्वामी जी महाराज ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ओलम्पिक पदक विजेता विजेन्द्र कुमार उपस्थित हुए। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवल के साथ की गई। इसके बाद हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष बाबूलाल जाटव ने कार्यक्रम की भूमिका व स्वागत भाषण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ अनुराग त्रिवेदी द्वारा किया गया। अंत में आभार प्रदर्शन समिति सचिव नरेन्द्र मीणा द्वारा किया गया। अतिथियों के स्मृति चिन्ह समिति के कोषाध्यक्ष गिर्राज सर्राफ द्वारा भेंट किए गए। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परम पूज्य उत्तम स्वामी जी ने कहा कि हिन्दू धर्म ही जो सभी का सम्मान करता है। सभी को सनातन धर्म का पालन करना चाहिए। उन्होंने रामायण का एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान राम ने सबरी के झूठे बैर खाकर नारी सम्मान का परिचय दिया था। जब श्रीराम वनवास से आयोद्धा लौटकर आए थे, तो उनकी माताओं ने उनके लिए 56 प्रकार के भोजन बनाए। भगवान श्री राम ने एक ग्रास खाया और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे, तब लक्ष्मण जी ने पूछा कि आप क्यों रो रहे हो, तब श्री राम ने कहा कि इस भोजन में वो स्वाद नहीं है जो, माता सबरी के झूठे बेरों में था।
कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए ओलम्पिक विजेता विजेन्द्र सिंह ने कहा कि हिन्दू कोई धर्म नहीं है, बल्कि यह जीवन शैली है। भारत युवाओं का देश है। यहां 60 प्रतिशत युवा है। उन्होंने अपने जीवन के घटित हुए एक घटनाक्रम को सुनाते हुए कहा कि जब एक प्रतियोगिता में भागीदारी करने के लिए मैं विदेश गया तो एक अंग्रेज ने मुझसे पूछा कि तुम्हारे धर्म में बहुत सारे भगवान है, तो क्या तुम कभी भ्रमित नहीं होते कि किसकी पूजा करनी है, तब मैने कहा कि हमारे यहां अगर बच्चा जब पड़ता है, तो माता सरस्वती की पूजा करता है। खेलता है तो जब हनुमान जी की पूजा करता है। मैं भी हिन्दू परिवार का ही बेटा हूं। सभी लोगों को देश और अपने परिवार के बारे में सोचना चाहिए। हमें विश्र विजेता बनना है। 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश जी सोनी ने कहा कि श्योपुर में आयोजित आसोजित आज के इस विशाल हिन्दू सम्मेलन में हिन्दू सम्मेलन किसी एक व्यक्ति का नही, बल्कि हम सब का है। जब हम हिन्दू होने के नाते यहां एकत्रित हुए हैं, तो उसमें यह विचार करने की आवश्यकता है कि इस दुनिया के अंदर बहुत देश हैं लेकिन सम्पूर्ण विषयों को अपना परिवार मनाने, अपना मानने वाला चाहे वह जड़ हो चेतन्य हो पशु हो, पक्षी हो या फिर मनुष्य हो, कोई भी हो उसमें ईश्वरत्य को देखने का वाला कोई दर्शन है, कोई धर्म है कोई संस्कृति है, तो वह हिन्दू है। जब 1093 में अमेरिका की धरती पर सब धर्मों के लोग एकत्रित हुए थे, तब उस समय उस सभा के अंदर हिन्दू धर्म की विजय ध्वजा को फहरया था, ऐसे स्वामी विवेकानंद ने सब देशों के सब धर्मों के सामने कहा था कि मैं विश्व के सब लोगों के सामने उपस्थित हूं करोड़ों करोड़ हिन्दूओं की और से, मैं यहा उपस्थित उस धर्म की ओर से हूं, जिसने इस दुनिया के किसी भी कोने में किसी को भी तकलीफ हुई तो सहारा दिया। उन्होंने उदाहरण दिया कि हजारों साल पहले यहूदियों को उनके देश इजराइल से उखाड़ दिया गया, तब उन्हें शरण भारत की धरती ने दी। जब ईरान से अग्रिपूजक पारसियों को इस्लाम के अनुयायियों ने खदेड़ा, तब उन्हें शरण भारत ने दी, तो इस नाते से हिन्दू का जो तत्वज्ञान है, जो धर्म है, दर्शन है, जो जीवन मूल्य है वह केवल भारत के भले के लिए नही, बल्कि सम्पूर्ण विश्व के सब लोग, सब देश आपस में भाई के रूप में रहें, आत्मीयता से रहें, यह संदेश अगर कोई दे सकता है तो यह हमारा हिन्दू धर्म दे सकता है। हम केवल अपने जीव की छोटी-छोटी बातों को देखें। यह मैं केवल पुराने जमाने की बातें नहीं कह रहा हूं। हिन्दुस्तान के अपने हर गांव के हर घर के अंदर जो परम्पराऐं थीं आज आधुनिकता के नाम पर हम उन्हें भूल रहे हैं। हर घर के अंदर मां भोजन बनाते समय पहली रोटी बनाती थी और अगर उसका इकलौता बच्चा अगर भूखा हो और कहे कि मां रोटी मुझे दो, तो मां बच्चे को रोकती थी कि यह रोटी तेरे लिए नहीं है, तो बच्चा पूछता था कि किसके लिए है, तो मां कहती थी कि यह रोटी गाय के लिए है। गाय के लिए रोटी, कुत्ते के लिए रोटी, सुबह उठते तो दो मुट्ठी अनाज छत पर डालते थे। क्योंकि कोई पक्षी भूखा होगा उसे खाने को मिलना चाहिए। ऐसी परम्परा थी। हर घर में पानी का एक पात्र टांगते थे, क्यों, कोई पक्षी प्यासा होगा, उसे पानी पीने को मिलना चाहिए। आज हम उस हिन्दू भाव से दूर हुए तो पक्षी तो छोडि़ए मनुष्य को भी पानी 15 रूपये में खरीद कर पीना पड़ रहा है। ये जो परम्पराऐं थी, पशु को पक्षी को, मछली को, चींटी को कोई अनजान आदमी दरवाजे पर आया है उसे भोजन के लिए पूछते थे। इसलिए यह दुनिया एक परिवार है, यह हमारे लोगों ने भाषण में नहीं कहा, बल्कि जिन्दगी के अन्दर रोज-रोज के व्यवहार ने यह बताया है और इसलिए हिन्दू सम्मेलन क्यों है हिन्दू जीवन मूल्य जिन्हें हम भूल गए हैं। फिर की उनकी ओर मुडऩे के लिए है। उसका केवल वर्णन नहीं यह हमारे जीवन में व्यवहार के लिए है। हमारे यहां भगवान को कण-कण में मानते हैं और इसलिए हमारे यहां भगवान मछली के रूप में अवतार लेता है मतस्य अवतार, कछुए के रूप में अवतार लेता है, कोरवा अवतार। आधा मनुष्य आधा पशु के रूप में अवतार लेता है, नरसिंह अवतार। जब हिर्नयाकक्षप अपने पुत्र प्रहलाद से पूछता है कि तेरा नारायण कहा हैं। तो कहता है सब जगह है, स्तम्भ में है क्या, कहता है हां, तब वह गदा मारता है तो पत्थर में से भी भगवान निकलते हैं। ऐसे मानने वाले हिन्दू समाज में जब यह बात आ गई। कोई किसी जाति के अंदर पैदा हुआ है तो हम उसे छुऐंगे नहीं। तो यह जो बात है कि व्यवहार में सब कहते हैं कि राम ने सबरी के झूठे बैर खाए, लेकिन हमारे घर के बगल में जो सबरी रहती है, उसे साथ हम केसे देखते हैं। अगर भगवान कण-कण में है तो किसी जात में कोई पैदा हो गया है तो उसे हम छुऐंगे नहीं, यह हिन्दू समाज के लक्षण है क्या? अगर हमारे गांव में पड़ोस में कोई बिना पड़ा लिखा है, कोई गरीब है, कोई भूखा है, तो हम उसकी चिंता नहीं करते, यह क्या हिन्दू होने का लक्षण है। हिन्दू सम्मेलन के लिए पिछले महीनों में हुए कार्यक्रम समाज को इन हिन्दू जीवन मूल्यों की ओर लौटाने का कड़ा प्रत्यत्न है। और आज का यह प्रसंग केवल ताली बजाने का नहीं है, हर एक हिन्दू को अपने दिल के अंदर गहराई से सोचने का है। हम क्या थे आज क्या हो गए? कल को हम को क्या होना है। एक-एक व्यक्ति को प्रयत्न करने की आवश्यकता है। एक बात इतिहास हमकों बताता है। इतिहास के अंदर जब-जब हिन्दू समाज के अंदर हिन्दू भावनाऐं कम हुई और अपने जात की, अपने जिले की, अपने प्रांत, की, अपनी भाषा की भावनाऐं उग्र हुई। उसका परिणाम क्या होगा। तो एक गीत था कि हिन्दू भाव को जब-जब भूले आई विपति महान, जब हम हिन्दू भाव को भूले जो भाई छूटा, धरती छूटी। गांधार हिन्दू देश था आज मुस्लिम देश हो गया। पाकिस्तान सम्पूर्ण हिन्दू क्षेत्र था, अब मुस्लिम देश हो गया। भाई छूटे, धरती खोई, सारे धर्म स्थान नष्ट हो गए। चाहे वह अयोध्या हो का हो, मथुर का हो या फिर काशी का। तो इस नाते से अगर अपने देश पर अपने समाज पर संकट नहीं लाना है तो हि भाव को नहीं भूलना है। आज-कल हिन्दुस्तान के अंदर बहुत सी ताकतें सक्रिय है जो छोटी-छोटी निष्ठाओं को हरा रही है। प्रचार कर रहीं है कि तुम हिन्दू नहीं हो। बनवासी समाज के बीच जाकर कहते हैं कि तुम गौंड हो, तुम सहरिया हो तुम हिन्दू नहीं हो, तुम भील हो हिन्दू नहीं हो। लेकिन वास्तव में किसी भी जाति का भाई हो अनुसूचित जनजाति का बंधु हो अनादि काल से इस हिन्दू परम्परा से जुड़े रहे हैं। सांस्कृतिक रूप से, धार्मिक रूप से जुड़े रहे हैं। मैं आपको उदाहरण देता हूं भारत में सूरज जहां सबसे पहले उगता है पूर्व दिशा में अरूणाचल प्रदेश वहां पितुपिशु नाम की जनजाति है, जो भगवान कृष्ण की पत्नी रूकमणी के बड़े भाई रूकमी का वंशज मानते हैं। खेती करते समय किसान राम और लक्ष्मण की शपथ लेकर खेती करता है। हम कच्चे मास पर जीने वाले लोगों को राम और कृष्ण ने खेती करना सियाखा। उड़ीसा ओर मेघालय में वनवाससियों ने लड़ते-लड़ते अपना जीवन बलिदान कर दिया। झारखण्ड में बिरसा-मुण्डा,  मध्य भारत में आयेंगे तो टांटिया भील, इन लोगों ने समाज में नशा मुक्ति लाकर अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ाई लड़ी। केरल से लेकर अरूणाचल तक इन वनवासी वीरों ने अंग्रेजों के विरूद्ध भारत के लिए लड़ाई है। सारा हिन्दू समाज प्रकृति पूजक है। हम सूर्य की पूजा करते हैं, हवा की पूजा करते हैं, जल की पूजा करते हैं। पशु-पक्षी,पेड़ सबकी पूजा करते हैं। यह सब बातें ऋषि मुनियों ने कही है। यही सब बातें हमारी सभी जनजातियों की परम्पराओं में है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सम्पूर्ण समाज के अंदर हिन्दू भाव को कमजोर करने का जो प्रयत्न चल रहा है। उसका हर घर से उत्तर दिया जाए। हमारे समाज में अगर विषमताऐं रहेंगी। छुआछूत में पड़े रहेंगे तो देश कभी एक नहीं रह सकता। इसलिए हम संकल्प ले कि गाय को मानने वाले, कृष्ण को मानने वाले, कण-कण में भगवान को मानने वाले हिन्दुओं आगे से किसी जाति कर हर बंधु अपना भाई है, उसके दु:ख-दर्द को रोजमर्रा के अपने व्यवहार के अंदर प्रस्तुत करें। आज आवश्यकता इस बात की है कि अपने जनजाति क्षेत्र के जो लोग छोटे-छोटे गांवों में जो गरीबी है, उसके लिए सामाजिक संस्थाऐं खड़ी हों, उनके अंदर शिक्षा का, संस्कार का, व्यसन मुक्ति का हर प्रत्यत्न करने की आवश्यकता है। अफसर गांव में शासकीय योजनाऐं लेकर गया, तो महिलाओं ने कहा कि आप तो कुछ मत बस एक काम कीजिए शराब बंद करवा दीजिए। जो कुछ होता है शराब पीने के कारण होता है। उत्तराखण्ड की एक गांव की महिलाओं ने शराब बंद कर दी। आज उस गांव के हर घर में मोटर साइकिल, स्कॉर्पियों आने लगीं है। कार्यक्रम को परम पूज्य उत्तम स्वामी जी और मुख्य अतिथि विजेन्द्र कुमार ने भी संबोधित किया।


मंच रहा आकर्षण का केन्द्र
प्रदूषण रहित वातावरण के अनुकूल बनाए गए आयोजन के मंच को लेकर भी लोगों में चर्चा का विषय रहा। लकड़ी, कागज, गोबर व लाल मिट्टी से बनाए गए मंच को आदिवासी संस्कृति के आधार पर माडंना बनाकर सजाया गया था। मंच के सामने बनाई गई रंगोली भी आकर्षण का केन्द्र रही।

झलकियां...

-नगर में जगह-जगह हुआ कलश एवं शोभायात्रा का स्वागत

- किन्नर समाज ने बरषाए फूल, कलश यात्रा में भागीदारी

- पांडाल में जगह कम पडऩे के कारण स्टेडियम के दीवार पर चड़े लोग 

- कलश यात्रा को देख, आश्चर्यचकित हुए लोग

- चन्द्रशेखर आजाद, भगतसिंह, रानी लक्ष्मीबाई, शिव-बारात, कृष्ण-अर्जुन की झांकिया रही आकर्षण का केन्द्र

- बोहरा समाज ने फूल बरसाकर किया कलश यात्रा का स्वागत 

- सभी जाति समाजों के लोगों जगह-जगह किया स्वागत-सत्कार

- देशभक्ति गीतों पर जमकर नाचे युवा