आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 21 Feb 2018 14:09:48


जाति-जाति में जाति है, जो केतन के पात |

रैदास मानुष न जुड़ सके, जब तक जाति न जात ||

अर्थ :- जाति प्रथा में बहुत पेचीदगियां है जैसे केले के ताने को छीलते जाओ तो पत्ते में पत्ता मिलाता है | सार अंततः कुछ नहीं निकलता | उसी तरह जाति-पाति का कोई सर नहीं है | मानव तब टाक इश्वर से नहीं जुड़ सकता जब तक जाति उसके मन से नहीं जाती | -गुरु रविदास