आसमां से ‘अवनि’ का संदेश, बेटियां बोझ नहीं; होती हैं खास

दिंनाक: 23 Feb 2018 18:10:41


भोपाल(विसंके)अवनि चतुर्वेदी फाइटर जेट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गई हैं। उन्होंने अकेले मिग-21 बाइसन विमान उड़ा कर यह कीर्तिमान स्थापित किया है। अवनि ने इसके लिए गुजरात के जामनगर एयरबेस से उड़ान भरी और पहली बार में इसे पूरा किया। इस तरह से अवनि फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गईं और इतिहास रच दिया।


एक फाइटर पायलट युद्ध की स्थिति में अवनि सुखोई जैसे विमान भी उड़ा सकती हैं। साल 2016 में अवनि के साथ-साथ भावना कांत और मोहना सिंह को इस काम के लिए चुना गया था। बीते एक साल तक तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग दी गई। बता दें कि इसके पहले 2016 के पहले भारतीय वासुसेना में महिलाओं को फाइटर प्लेन चलाने की अनुमति नहीं थी। मगर अनुमति मिलने के दो साल बाद ही अवनि ने पहली महिला फाइटर प्लेन पायलट बनने का तमगा अपने नाम कर लिया।

अवनि का बचपन मध्यप्रदेश में रीवा के पास एक छोटे से कस्बे में बीता। शुरूआती पढ़ाई अवनि ने हिंदी माध्यम में की है। अवनि के पिता दिनांकर चतुर्वेदी ने बीबीसी से कहा, "बचपन से अवनि बहुत शांत स्वभाव की थी। मगर उसे अनुशासन में रहना पसंद था। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि उसे पायलट ही बनना है। अवनि ने 10वीं और 12वीं दोनों ही बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल में टॉप किया था। उसके बाद आगे की इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए वो वनस्थली विद्यापीठ चली गईं।

अवनि के पिता खुद भी पेशे से इंजीनियर हैं। उनकी मां हाउस वाइफ हैं। उनका एक बड़ा भाई है जो भारतीय सेना में है। दिनांकर चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई तक अवनि को नहीं मालूम था कि वो आगे चल कर पायलट बनना चाहती हैं। दिनांकर चतुर्वेदी ने बताया, '2003 में कल्पना चावला की मौत के बाद जब अवनि ने उनके बारे में पढ़ा, तब पहली बार उसने मुझसे अंतरिक्ष में उड़ान भरने की इच्छा जाहिर की।'

भाई के सेना में होने की वजह से उन्होंने एक सैनिक के जीवन को भी काफी करीब से देखा है। देशसेवा का जज़्बा उन्हें भाई से ही मिला। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अवनि ने एयरफोर्स की टेक्निकल सर्विस में जाने वाली परीक्षा दी और उसमें पास होने के बाद फाइटर पायलट बन गईं। फिलहाल अवनि एयरफोर्स के जामनगर एयरबेस में हैं। इतिहास रचने के बाद पिता से उनकी बात नहीं हुई है। फिर अवनि के पिता को बेटी के कारनामे का पता कैसे चला, इस पर दिनांकर चतुर्वेदी ने हंसते हुए कहा, "बीती रात आपकी ही तरह एक मीडियाकर्मी का फोन आया था। तब मुझे मेरी बेटी के कारनामे का पता चला। हालांकि वो एक दिन सफल होगी, इसका मुझे हमेशा से भरोसा था।'

वायुसेना की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने अकेले मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान उड़ाकर इतिहास में नाम दर्ज कर लिया है। वह देश की पहली महिला पायलट हैं, जिन्हें ये गौरव मिला है।

वायुसेना के एक अधिकारी ने बुधवार को यहां बताया कि अवनी ने जामनगर एयरबेस से सोमवार को यह कारनामा अंजाम दिया। उन्होंने अकेले उड़ान भरी और अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। मिग-21 बाइसन की लैंडिंग और टेक-ऑफ स्पीड दुनिया में सबसे ज्यादा बताई जाती है।

फाइटर पायलट के पहले बैच के रूप में वायुसेना ने तीन महिलाओं अवनी, भावना कांत और मोहना सिंह को प्रशिक्षण दिया है। तीनों को कड़े प्रशिक्षण चरण से गुजरना पड़ा। तीनों ने जुलाई 2016 में वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन लिया था।

एक साल के अंदर ही सरकार ने प्रयोग के तौर पर महिलाओं को फाइटर पायलट के रूप में तैयार करने का फैसला किया। वायुसेना ने फाइटर पायलट बनाने के लिए तीन महिलाओं के दूसरे बैच का भी चयन कर लिया है। दुनिया के चुनिंदा देशों जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, इस्राइल और पाकिस्तान में ही महिलाएं फाइटर पायलट बन सकती हैं।