आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 23 Feb 2018 18:33:09

 

हमने बहुत – बहुत आसू बरसायें हैं. अब हमें कोमल भाव धारण करने का समय नहीं है. कोमलता की साधना करते –करते हम लोग जीते – जी ही मुर्दे हो रहे हैं. हमारे देश के लिए इस समय आवश्यकता है –लोहे कि तरह ठोस मांस पेशियां और मजबूत स्नायु वाले शरीरों की. आवशयकता है इस तरह इच्छा –शक्ति सम्पन्न होने की, ताकि कोई भी उसका प्रतिरोध करने में समर्थ न हो.  

स्वामी विवेकानंद