26 फरवरी / पुण्यतिथि - अमर क्रांतिकारी वीर विनायक दामोदर सावरकर

दिंनाक: 27 Feb 2018 16:24:14


देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्ववादी चिंतक विनायक दामोदर सावरकर का संपूर्ण जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत है. वे ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी. उनके अदम्य साहस और धैर्य का लोहा अंग्रेज अधिकारी भी मानते थे. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे, जिन्हें राजद्रोह के आरोप में दो आजन्म कारावास की सजा सुनायी गई. इन्होंने पहले लेखक की ख्याति ’1857 का स्वातंत्रय समर’ लिखकर प्राप्त की. इस ग्रन्थ का प्रचार भगतसिंह और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने किया. वे पहले साहसी बन्दी थे जिन्होने इंगलैण्ड से भारत लाए जाते समय सामुद्रिक जहाज से कूद कर भागने का प्रयास किया. इनके अधिकांश ग्रन्थ जब्त किए गए. इनकी इंगलैण्ड मे लिखी कविताओं ’ओ शहीदों ’ और गुरू जलकर राख क्यों नहीं हो जाता ? वीर विनायक दामोदर सावरकर कुख्यात अन्डमान की सेल्युलर जेल में बन्द थे. अन्डमान में हिन्दू बन्दियों की देखरेख के लिए अंग्रेज अधिकारियों की शह पर तीन मुसलमान पहरेदार रखे गए थे. कारागार में मुसलमान पहरेदार हिन्दू बन्दियों को परेशान कर मुसलमान बना लेते थे. सावरकर जी ने ऐसे धर्मान्तरितों को शुद्ध कर फिर से हिन्दू  बनाया. वीर विनायक दामोदर सावरकर का देहावसान 26 फरवरी, 1966 को हुआ था.


साभार:- पथिक संदेश