आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 28 Feb 2018 19:28:24


इस देश का प्राण धर्म है, भाषा धर्म है, भाव धर्म है और तुम्हारी राजनीति, समाजनीति, दुर्भिक्षग्रस्त को अन्नदान यह चिरकाल से इस देश में जैसा हुआ है वैसा ही होगा अर्थात धर्म के माध्यम से यह सब होता है तो हो अन्यथा तुम्हारा चिल्लाना व्यर्थ होगा.

- स्वामी विवेकानन्द