शिक्षा बनाती है मनुष्य जीवन को अर्थपूर्ण: डॉ. मोहन भागवत जी

दिंनाक: 03 Feb 2018 14:15:10


भोपाल(विसंके). भारत भारती के वार्षिकोत्सव महानाट्य जाणता राजा का ऐतिहासिक मंचन.

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के परम् पूज्य सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य सोचता है कि पढ़-लिखकर क्या करूंगा... कितना बड़ा बनूंगा, परंतु विद्या मात्र पेट भरने का साधन नहीं है, सिर्फ आजीविका सिखाने वाली चीज नहीं है. उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य के जीवन में लक्ष्य देती है... शिक्षा मनुष्य के जीवन को अर्थपूर्ण बनाती है... शिक्षा मनुष्य के जीवन में ज्ञान विज्ञान का विकास करती है.
भारत_भारती आवासीय विद्यालय जामठी के वार्षिकोत्सव में महानाट्य जाणता राजा के मंचन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में उक्त बातें कही। श्री भागवत ने कहा कि मनुष्यों के विद्यालय महाविद्यालय सर्वत्र है, पशुओं के नहीं है क्योंकि पशुओं को सीखने की आवश्यकता नहीं होती. भौतिक जीवन जीने के लिए जो सीखना चाहिए वो बात स्कूल कॉलेज में सीखने की नहीं होती है. परंतु मनुष्य जीवन जीना चाहता है और जीवन को अच्छा बनाना चाहता है. मनुष्य विचार करता है... उसके मन में प्रश्न होते है, जिसके वह उत्तर खोजना चाहता है. मनुष्य को जीवन जीने का उद्देश्य चाहिए. इसलिए मनुष्य के जीवन में शिक्षा महत्वपूर्ण है.
अपने आपको जानना जरूरी है
संघ प्रमुख श्री भागवत ने कहा कि बाहर की शिक्षा भी जरूरी है क्योंकि इसके बिना काम नहीं चलता है परंतु मनुष्य तब वास्तविक रूप से मनुष्य बनता है जब वह अपने आप को जानता हो. उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना दुनिया से परिचित होता है उतना उसे स्वयं से भी परिचित होना जरूरी है. उपनिषदो में कहा कि दोनों क्रियाएं साथ-साथ चलनी चाहिए. श्री भागवत ने कहा कि अपना जीवन कैसे समृद्ध करना है और प्रकृति को कैसे ठीक रखना है, यह जानना जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि दुनिया में शाश्वत जीवन प्राप्त करना है तो विद्या का अवलंबन करना होगा. उन्होंने का कि एक तरफ जाने वाला अंधकार में फंसता है और केवल अंदर जाने वाला तो घारे अंधकार में फंस जाता है. इसलिए दोनों को जानकर एवं उपयोग कर अपने जीवन को सार्थक बनाना होगा. 
कमाई बांटने वाला चाहिए 
आरएसएस प्रमुख श्री भागवत ने कहा कि लोक कल्याण विश्व कल्याण विश्व कल्याण के लिए आज कमाई बांटने वालों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आजकल पालक बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर बनने की प्रेरणा देता है जिससे पैसा मिलेगा. परंतु पैसे वालों की लिस्ट बहुत लंबी है सबको मालूम है परंतु कौन याद रखता है. परंतु आज भी आजादी की लड़ाई लडऩे के लिए महाराणा प्रताप को अपनी सारी दौलत देने वाले भामाशाह को सभी याद रखते है. श्री भागवत ने कहा कि दुनिया में राजा महाराजा बहुत हुए परंतु उन्हें कौन याद रखता है? परंतु पितृवचन के कारण राजपाट छोड़कर 14 वर्षो का वनवास भुगतने वाले रामचंद्र को 8 हजार साल बाद भी याद रखा जाता है. उन्होंने कहा कि हम मनुष्य है और सृष्टि से हमारा रिश्ता है. उन्होंने कहा कि हमें कमाकर वापिस करना चाहिए. भरपूर कमाई करें लेकिन अपनी कमाई को न्यूनतम आवश्यकतानुसार अपने पास रखकर बाकी कमाई लोक कल्याण विश्व कल्याण के लिए दें. ऐसे मनुष्यों को खड़ा करना हमारी परंपरा का आदर्श है.
शिवाजी के आदर्शो से ले प्रेरणा 
श्री भागवत ने कहा कि महानाट्य जाणता राजा में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के आदर्शो का उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि संकटो को झेलकर शिवाजी ने अपने देश को दुखों से मुक्त कराया था. उनके पास धन दौलत सैन्य शक्ति सब कुछ था परंतु स्वयं के लिए नहीं प्रजा के लिए था. उन्होंने आम जन से अपील की कि शिवाजी के आदर्शो जीवन मूल्य से प्रेरणा लेकर बच्चों को उसका अनुकरण करवाये. 
भारत भारती में सिर्फ सिलेबस की पढ़ाई नहीं होती 
संघ प्रमुख श्री भागवत ने भारत भारती आवासीय विद्यालय एवं वहां चल रहे प्रकल्पों की मुक्त कंठ से सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत भारती में सिर्फ सिलेबस की पढ़ाई नहीं होती है. बल्कि यहां कृषि, पर्यावरण, कला का पाठ भी पढ़ाया जाता है. साथ ही कम्प्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है. उन्होंने कहा कि भारत भारती में आधुनिक तकनीकि से लेकर जीवनोपयोगी शिक्षा के साथ ही यहां संस्कार राष्ट्रभक्ति का पाठ भी पढ़ाया जाता है.
संघ प्रमुख का किया भव्य स्वागत 
भारत भारती विद्यालय जामठी के वार्षिक उत्सव में महानाट्य जाणता राजा के मंचन में बतौर मुख्य अतिथि संघ प्रमुख मोहन भागवत का मुकेश खंडेलवाल एवं बुधपाल सिंह ठाकुर ने पगड़ी पहनाकर एवं श्रीफल भेंट कर भव्य स्वागत किया. कार्यक्रम के अध्यक्ष सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. रमेश धोटे एवं विशेष अतिथि उद्योगपति अतुल लड्डा का भी स्वागत किया गया. विद्यालय के प्राचार्य राहुल देव ठाकरे ने संस्था का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा संचालन सचिव मोहन नागर ने किया.