संस्कारमूलक भौतिक विकास चाहिए -डॉ. मोहनराव भागवत.

दिंनाक: 05 Feb 2018 16:17:05


भोपाल(विसंके). भारत भारती में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्राम विकास सम्मेलन में शनिवार, 3 फरवरी को देशभर के कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र के प्रभात ग्रामो में चलने वाली गतिविधियों पर दिन भर के सत्रों में विस्तृत चर्चा की, कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जहाँ कृषि, गौपालन, गौ संवर्धन होता है. जहाँ जल, जंगल है. जहां जन, जानवर सुख पूर्वक रहते है वही गांव है. गाँव की पांच शक्तियों धार्मिक शक्ति, युवा शक्ति, मातृशक्ति, सज्जन शक्ति और संघ शक्ति के द्वारा सप्त सम्पदा, भू सम्पदा, जल सम्पदा, वन सम्पदा, गौ सम्पदा, जीव सम्पदा, ऊर्जा सम्पदा, जन सम्पदा का संरक्षण होना चाहिए तथा जन की शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, स्वावलम्बन की चिंता होनी चाहिए. वह संघ की भाषा में प्रभात ग्राम है. ऐसे ग्राम देशभर में 318 है.


।। देश के 10 फीसद आदर्श बने ग्राम ।।

श्री भागवत ने कार्यकर्ताओं से कहा कि देश में पौने सात लाख स्थानों में साढ़े पांच लाख ग्राम है. हमें कम से कम दस प्रतिशत ग्रामों को प्रभात ग्राम बनाना होगा तब देश में अच्छे ग्राम बनाने की लहर पैदा होगी. उन्होंने कहा कि ग्राम स्वावलम्बी होना चाहिए. जहर मुक्त कृषि अर्थात जैविक कृषि होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि विकास की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. यह समय के साथ बदलती जाती है इसीलिए नई पीढ़ी को ग्राम विकास समिति से जोडऩा चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्राम का विकास दस पंद्रह लोगों का कार्य नहीं है उसके लिए पूरे गांव के लोगों को जुटना होगा. ग्राम विकास समिति के द्वारा यह देखा जाना चाहिए कि ग्राम का कोई भी व्यक्ति भूमि हीन न हो. गांव का विकास गांव के लोग मिलकर करें. त्रिदिवसीय इस बैठक का आज 4 फरवरी को समापन होगा.
।। ग्राम दर्शन कर अभिभूत हुए देश भर के कार्यकर्ता ।।


राष्ट्रीय स्वयं संघ के तीन दिवसीय ग्राम विकास सम्मेलन में पूरे भारत देश से आए 400 कार्यकर्ताओं द्वारा ग्राम विकास की परिकल्पना-अवधारणा को समझने व ग्रामीण परिवेश का प्रत्यक्ष अनुभव करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया गया. इसके तहत 10 ग्रामों का चयन किया गया था. भारत भारती से सभी प्रदेशों के सदस्यों को सम्मिलित करते हुए 40-40 सदस्यों के 10 समूह बनाए गए हैं जिसमें महिला सदस्य भी शामिल थीं. 10 समूह को अलग-अलग बसों से चयनित ग्राम बांचा (खदारा), रामपुरमाल, गोंडी बडगी (लावन्या), खापरखेड़ा (मंडईखुर्द), महेंद्र वाड़ी, जाड़ीढाना, घोघरी, संरडई, मोरडोंगरी, जसौंदी पहुंचे. जहां पर ग्रामीणों ने ग्राम प्रवेश द्वार पर ही पारंपरिक नृत्य व कलश यात्रा के साथ गांव पधारे सभी सदस्यों का जोरदार स्वागत किया. इसके बाद सदस्यों के 5 समूहों का दल गठन किया गया जिसमें ग्राम के ग्रामीणों को भी शामिल किया गया था। प्रत्येक समूह को ग्रामीणों द्वारा किए गए कार्यों के अवलोकन व निरीक्षण हेतु भी भेजा गया.

।। गांव-गांव पहुंचे कार्यकर्ताओं के दल ।।

पहले दल ने शिक्षा व संस्कार विषय पर ग्रामीणों को समझाईश दी. दूसरे समूह द्वारा ग्रामीणों को स्वास्थ्य व आयुर्वेद को लेकर किए गए कार्यों को देखकर समझाईश दी गई कि उनके पास उपलब्ध औषधियों से किस प्रकार प्रयोग कर निरोग रहा जाता है. तीसरे समूह ने स्वालंबन विषय पर किए गए कार्यों को देखा जिसमें सबसे पहले अन्नपूर्णा मंडप जिसके अंतर्गत ग्राम में निस्तार के पानी की कैसी व्यवस्था की जाती है और उससे कैसे सब्जियों और मसालों का उत्पादन किया जाता है देखा गया. चौथे समूह ने पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को देखा और ग्रामीणों के साथ अपने अनुभव साझा किए. पांचवें समूह ने सांस्कृतिक जागरण के तहत किए गए कार्यों को देखा जिसके अंतर्गत ग्राम देवता का मंदिर, घर, ग्राम, सड़क की सफाई, प्लास्टिक मुक्त घूरा देखा गया और कचरे से खाद का निर्माण कैसे किए जाता है और उससे क्या लाभ है? इसकी समझाईश ग्रामीणों को दी गई. 

।। करीब से देखा जनजातीय शिक्षा का कार्य ।।

भारत भारती प्रकल्प और ग्राम दर्शन कर देश भर से आए कार्यकर्ता अभिभूत हो गए. 400 से अधिक ग्राम विकास कार्यकर्ताओं ने बैतूल के दस आदर्श ग्रामों का भ्रमण कर जनजाति शिक्षा का कार्य को करीब से देखा। 2 फ रवरी 2018 बैतूल के इतिहास में एक स्वर्णिम पृष्ठ जुड़ गया. इस दिन जहाँ भारत भारती आवासीय विद्यालय के ऐतिहासिक वार्षिकोत्सव में मंचित महानाट्य जाणता राजा में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने हजारों लोगों को सम्बोधित किया. वहीं भारत भारती में प्रथम बार संघ के देशभर के 400 से अधिक तपस्वी कार्यकर्ताओं का सम्मेलन हो रहा है. यह सर्वविदित है कि भारत भारती शिक्षा संस्थान शिक्षा के साथ जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण, जल संवद्र्धन, जनजाति समाज में शिक्षा व स्वावलम्बन सहित ग्राम विकास की गतिविधियों का भी जीवंत केन्द्र है. ग्राम विकास सम्मेलन में भाग लेने आये कार्यकर्ताओं ने 2 फरवरी को प्रात: 10 से 12 बजे तक भारत भारती परिसर का भ्रमण कर यहाँ संचालित प्रकल्प गौशाला, जैविक कृषि, आईटीआई, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, जैविक खाद निर्माण केंद्र, अपशिष्ट जल प्रबंधन संयंत्र, ग्रामीण विद्यालय, मशरूम प्रशिक्षण केंद्र आदि को देखकर अभिभूत हुए. कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक ही परिसर में इतने प्रकल्पों का एक साथ संचालन एक अनुकरणीय कार्य है. 

।। ग्रामीणों से चर्चा कर अभिभूत हुए कार्यकर्ता ।।

परिसर भ्रमण के बाद सभी कार्यकर्ता बसों द्वारा उन गाँवों में गए जहाँ विद्या भारती की जनजाति शिक्षा के एकल विद्यालय और भारत भारती के द्वारा ग्राम विकास के सफ ल प्रयोग किये जा रहे है. उन दस ग्रामों का भ्रमण कर तथा ग्रामीणों से चर्चा कर देश भर के कार्यकर्ता अभिभूत हो गए. छोटे-छोटे जनजाति ग्रामों में ग्रामीणों के सहयोग से विद्या भारती द्वारा किये जा रहे कार्य तथा एकल विद्यालय द्वारा बच्चों में शिक्षा और संस्कार का कार्य, अन्नपूर्णा मंडपम, प्लास्टिक मुक्त घूरा, ग्राम स्वच्छता, बोरी बंधान, जैविक कृषि, पौधारोपण, देवस्थानों के प्रति आस्था आदि कार्य प्रत्यक्ष देखकर कार्यकर्ताओं ने एकल विद्यालय और ग्रामीणों की प्रशंसा की तथा तीन घंटे से भी अधिक समय ग्रामीणों के साथ बिताया. इन दसों ग्रामों में भी कल उत्सव जैसा वातावरण था. ग्रामीणों ने भी कभी कल्पना नहीं की थी कि उनके द्वारा किये जा रहे छोटे-छोटे कार्य देखने कोई गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल, राजस्थान से आयेगा. हर ग्राम में ग्रामवासियों ने अपनी परम्परागत पद्धति से देशभर से आए अतिथियों का स्वागत किया.