प्रसंगवश - मिसाइल का जवाब तो मिसाइल से ही देना होगा - आर.के.सिन्हा

दिंनाक: 09 Feb 2018 18:44:08

भोपाल(विसंके). भारत और चीन के बीच ढाई-तीन महीने तक भारत-भूटान-चीन की सीमा पर डोकलाम में तना-तनी के बाद जब सीमा पर शांति कायम हुई तो पाकिस्तान ने मोर्चा खोल दिया। धूर्त पाकिस्तान की शैतानी हद से बाहर हो गई है। बीते दिनों उसने भारत पर मिसाइल तक दाग दिया। पाकिस्तान को यह मिसाइल अमेरिका ने अफगानिस्तान में अलकायदा से मुकाबला करने के लिए दिया था, जिसका दुरुपयोग वो भारत के खिलाफ कर रहा है। माना जा सकता है कि चीन और पाकिस्तान भारत को किसी भी तरह सीमा विवाद में उलझा कर रखने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति वाकई गंभीर है। इसलिए भारत को अब अपनी कूटनीति और रणनीति में बदलाव तो करना ही होगा, रक्षात्मक रवैया भी छोड़ना होगा। भारत की आक्रमण की पहल नहीं करने की परंपरागत नीति रही है। लेकिन, हमारी विनम्रता को कमजोरी मान लिया जाता है। इसलिए समय-समय पर यह बताना भी जरुरी हो गया है कि विनम्रता हमारी कमजोरी नहीं है। एक कहावत है कि “कभी-कभी तो अरबी घोड़ों को भी जोर से एड़ी मारनी पड़ती है।" ये पाकिस्तान तो अरबी घोड़े नहीं खच्चर हैं। इन्हें, समय-समय पर इनकी औकात तो बताना ही पड़ेगा।

दरअसल भारत से लगातार तीन बार 1948, 1965, 1971 और फिर कारगिल के छद्म युद्ध में धूल चाट चुके पाकिस्तान को तबीयत से मार खाने की इच्छा हो रही है। लातों का देवता पाकिस्तान वार्ता से आपसी मसले सुलझाने के लिए तैयार ही नहीं है। उससे उसका पड़ोसी ईरान और कभी उसका खुद का हिस्सा रहा बांग्लादेश भी बुरी तरह से नाराज है। ऐसे में अगर भारत की सैन्य़ शक्ति के समक्ष चीन जैसा शक्तिशाली और अहंकारी देश भी भाग खड़ा हो सकता है, तो फिर दो कौड़ी के पाकिस्तान की औकात ही क्या है?

पानी मांग रहा चीन

बुद्ध और गांधी का देश भारत कभी युद्ध के विचार को आगे नहीं बढ़ा सकता, लेकिन ये भी नहीं भूलना चाहिए कि यह वीर अर्जुन और कर्ण का भी देश है और आज इसकी स्थिति 1962 जैसे कमजोर राष्ट्र की भी नहीं है। इसीलिए भारत सरकार के दृढ़ रुख के कारण ही डोकलम पर जबरन कब्ज़ा करने की धमकी देने वाला चीन भी अंततः बाज आ गया। भारत के हौसले से पस्त चीन को अपनी रेड आर्मी को वापस बैरक में भेजना पड़ा। इसीलिए अब चीन पाकिस्तान के कंधे पर बन्दूक रख कर गोली चला रहा है। लगता है कि चीन ही पाकिस्तान को भारत पर मिसाइल दागने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

बांटता आतंकवाद

आज पूरे विश्व को पता है कि पाकिस्तान आतंकवाद की सप्लाई करता है। जिस देश में ओसामा बिन लादेन जैसे खूंखार आतंकवादी को सुरक्षित पनाह मिली हो, उसके बारे में आप क्या कहेंगे? पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता पर रोक लगाकर विश्व को स्पष्ट संदेश दिया कि अब आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश अमेरिका के दोस्त तो हर्गिज नहीं हो सकते। अमेरिका की ओर से ऐसे कड़े संदेश का लंबे समय से इंतजार भी किया जा रहा था। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट आरोप लगाया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान पर्याप्त काम नहीं कर रहा है। यानी पाकिस्तान की असलियत से अब सभी वाकिफ हो गए हैं।

करो अपने पर भरोसा

पिछले सत्तर साल में जब भी पाकिस्तान से हमारे संबंध खराब हुए तो सैन्य प्रतिकार करने की जगह हम पूरे विश्व के सामने अपना पक्ष रखने में लगे रहे। मंशा यही रहती थी कि जब शेष संसार हमारे साथ खड़ा हो जाए तभी हमें समझना होगा कि भारत के लिए लड़ाई शुरू करने का वक्त आ गया है। इस मनोवृत्ति से हम लगातार कमजोर पड़ते गए। दूसरा देश हमें नैतिक समर्थन तो दे सकता है, पर लड़ना तो अपने देश को ही होगा। कोई भी कमजोर का साथ नहीं देता। जब हमारा राष्ट्र मजबूत होगा, तभी दूसरे भी हमारा साथ देंगे।

आज के जमाने में कोई यह समझता है कि जंग सिर्फ सेना लड़ती है तो ये उसकी घोर मूर्खता होगी। युद्ध देश लड़ता है। समूची जनता का बल सेना के पीछे खड़ा रहता है। चीन के साथ डोकलाम विवाद के समय भी अनुभव किया गया कि चीनी विस्तारवादी रवैये के खिलाफ कोई भी देश हमारे साथ खुलकर खड़ा नहीं हुआ। और तो और, जिस ब्रिक्स के भारत और चीन दोनों ही सदस्य है, उसके बाकी सदस्यों ने भी दोनों देशों को एक टेबल पर लाने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। जब ब्रिक्स की यह स्थिति है तो फिर सार्क देशों की तो चर्चा करना ही व्यर्थ है। श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, भूटान और मालदीव में इतनी कुव्वत ही कहां कि वे हमारे पक्ष में हिम्मत करें। लेकिन, जब हम मजबूती दिखायेंगे तो अमेरिका से लेकर इजराइल तक सभी शक्तियां हमारे पक्ष में खड़ी होंगी।

म्मू में रहने वाले एक मित्र बताते हैं कि सीमा पार से लगातार पाकिस्तानी फायरिंग हो रही है। 2017 में ही 860 बार से ज्यादा पाकिस्तान ने युद्ध विराम का उल्लंधन किया है। पाकिस्तान आरएस पुरा सेक्टर से पुंछ सेक्टर तक भारतीय सीमा के अन्दर रिहायशी इलाकों में लगातार गोले बरसा रहा है। हमारे सैकड़ों जवान शहीद हो चुके हैं। दर्जनों नागरिक गोलियों का निशाना बन चुके हैं। सरहद पर बसे अनेकों गांव खाली हो गए हैं। सेना और बीएसएफ के जवान भी जवाबी हमले कर रहे हैं। कुल मिलाकर सरहद पर युद्ध जैसे हालात हैं। लेकिन, अब जवाबी कार्रवाई को छोड़कर आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत आ गई है। पाकिस्तान को यह बताना ही पड़ेगा कि हम रक्षात्मक ही नहीं, आक्रामक भी हो सकते हैं।

चीन के दबाव में नहीं

आपको याद होगा कि डोकलाम विवाद के दौरान भारत का रुख शुरू से ही साफ था कि किसी भी हालत में चीन के दबाव में नहीं आना है। हां आपसी सहयोग और सीमा पर जारी तनाव को दूर करने के लिए भारत हमेशा तैयार था और आज भी तैयार है। भारत चीन से बराबरी के संबंध चाहता है। भारत को चीन की धौंस सिरे से नामंजूर है।चीन ने लद्दाख में भी घुसपैठ की चेष्टा की थी, जिसे भारतीय फौज ने पूरी तरह विफल कर दिया। उसको अब यह स्पष्ट संदेश मिल गया है कि इस बार भिडंत गुलाब के फूल वाले नेहरु से नहीं, बल्कि 56 इंच के सीने वाले दृढ़संकल्प प्रधानमंत्री मोदी से है। जिस तरह का कड़ा और सख्त संदेश हमने चीन को दिया है, उसी तरह का मुंहतोड़ जवाब जल्द ही पाकिस्तान को भी देना होगा। इस एटमी गुंडे को मुंहतोड़ सबक सिखाने के लिए अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। गरीबी और बदहाली से त्राहिमाम करते पाकिस्तान का रुख शुरू से भारत विरोधी रहा है। वह भारत विरोध पर ही जिन्दा है। ऐसे में पाकिस्तान को कड़ा संदेश तो देना ही होगा। भारतीय सीमा में दागे उसके मिसाइल का जवाब उससे भी बड़े मिसाइल से हमला करके देना होगा। अब दुष्ट पाकिस्तान को सदा के लिए शांत कर देने की ही जरूरत है ।