भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बीच ममता की छटपटाहट : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दिंनाक: 21 Mar 2018 19:18:22


देश में जैसे-जैसे एक के बाद एक राज्‍य भाजपा के रथ पर सवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह विजित करते जा रहे हैं, वैसे-वैसे कांग्रेस जैसी राष्‍ट्रीय राजनीतिक पार्टी के साथ कई क्षेत्रीय पार्टियों में हलचल मचती जा रही है। यह हलचल इस बात की भी है कि कहीं इसी प्रकार भारतीय जनता पार्टी का रथ राज्‍यों में निर्विघ्‍न आगे बढ़ता रहा तो कहीं ऐसा न हो कि भविष्‍य में उनके अस्‍तित्‍व पर ही संकट खड़ा हो जाए और क्षेत्रीय पार्टियां अपना असर खो दें । इस सब के बीच जो सबसे अधिक व्‍याकुल एवं परेशान हैं, उनमें पश्‍चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी का नाम सबसे ऊपर लिया जा सकता है । वे भाजपा से इस हद तक प्रभावित नजर आ रही हैं कि आगे सत्‍ता जाने के भय से ममता किसी भी सीमा को पार करने को तैयार हैं । वस्‍तुत: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के साथ ममता बनर्जी की हाल ही में हुई मुलाकात को भी इस संदर्भ के साथ जोड़कर देखा जा सकता है।
ममता आज राष्‍ट्रीय राजनीति में मुख्‍य भूमिका में रहते हुए भाजपा से 2019 के आम चुनावों में मुकाबला करने के लिये संघीय मोर्चे के गठन में लगी हुई हैं। चंद्रशेखर राव के साथ ममता की यह बैठक बता भी रही है कि संघीय मोर्चा गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ममता आज खुलकर यह बोलती भी हैं कि हम नहीं चाहते कि कोई खास दल शासन करे और जो भी वह चाहे करता रहे। इसके अतिरिक्‍त जिस तरह से ममता सरकार ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विद्या भारती के 125 स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है, उससे भी साफ झलक रहा है कि ममता भाजपा के हर उस ताकत देनेवाले कदम को रोक देना चाहती है जो उसे आगे सत्‍ता से दूर कर सकता है।

वस्‍तुत: वोट बैंक की राजनीति के लिए ममता इतना ही नहीं कर रही हैं वह इससे भी आगे जाकर मदरसों को लेकर ज्‍यादा संजीदा हैं। राज्‍य से सरकार के स्‍तर पर जितनी अधिक मदद दी जा सकती है वह उन्‍होंने मदरसों के लिए खोल रखी है। आश्‍चर्य तो यह है कि वह नौकरियों में भी अल्‍पसंख्‍यकों को विशेष आरक्षण देने के साथ उन्‍हें सुविधाएं मुहैया करा रही है, जिससे कि उसका वोट बैंक खासकर मुस्‍लिम वोट पक्‍का हो सके। यहां अभी प्राय: देखने में यही आ रहा है कि राज्‍य में पिछले दिनों भाजपा का तेजी से विस्‍तार हुआ है। राज्‍य में अब तक भाजपा को साम्‍प्रदायिक मानकर उससे दूरी बनानेवाले भाजपा के साथ जुड़ रहे है। यहां भाजपा के बढ़ते प्रभाव को कम करने की ममता की छटपटाहट इतनी अधिक है कि उनकी सरकार ने केंद्र की योजनाओं का राजनीतिक फायदा लेने के लिए उनका प्रादेशिकीकरण करना आरंभ कर दिया है। इस दृष्‍ट‍ि से अभी तक वे कई मोदी नीत भाजपा सरकार की योजनाओं का बंगालीकरण कर चुकी हैं।

इसके पीछे ममता का तर्क है कि जब योजनाओं में राज्य सरकार का 40 फीसद खर्च वहन होता है तो नाम बदलने में परहेज कैसा? इसलिए उनकी सरकार को नाम बदलने का हक है। इस संबंध में एक आंकड़ा देखें तो ममता सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना का नाम बदलकर आनंदाधारा कर दिया। यहां स्वच्छ भारत अभियान निर्मल बांग्ला हो गया और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को सबर घरे आलो कर दिया गया है। यही हाल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का है, जोकि अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन तथा बांग्लार गृह प्रकल्प हो गई हैं ।

वस्‍तुत: इस तरह से यदि ममता के बीते शासनकाल को देखें तो रामनवमी पर हिन्दुओं को उत्‍सव मनाने की अनुमति नहीं देना, दुर्गा विसर्जन पर विवाद खड़ा करना, मालदा जैसी तमाम घटनाओं का लगातार होना जिसमें कि हिन्‍दुओं को ही निशाना बनाया गया तथा इससे भी बढ़कर लगातार बांग्‍लादेशी मुस्‍लिमों की घुसपैठ व पश्‍चिम बंगाल में रोहिंग्याओं के पहचान पत्र बनाये जाने का प्रकाश में आना यह साफ बता रहा है कि यहां ममता हर हाल में सत्‍ता पर काबिज बने रहने के लिए देश की सुरक्षा और अखण्डता के साथ समझौता करने से भी नहीं चूक रही हैं। क्‍योंकि जब मोहम्मद इस्माइल को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया तो उसने खुद स्‍वीकारा कि ममता के राज में रोहिंग्याओं के प्रमाण पत्र बनाने का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है, कोलकाता में रोहिंग्यों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाये जाने का एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है। इस मोहम्मद इस्माइल के पास न केवल जन्म प्रमाण पत्र मिला बल्कि पुलिस ने आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पैन कार्ड भी इससे बरामद किये।

वस्‍तुत: इस सभी घटनाओं और ममता सरकार की सोची समझी योजनाओं के क्रियान्‍वयन से साफ पता चलता है कि इन दिनों ममता बनर्जी को त्रिपुरा में कम्‍युनिष्‍टों के ढहे गढ़ के बाद भाजपा की बढ़ती ताकत एवं उसकी स्‍वीकार्यता की आंधी से अपनी सरकार के जाने का डर सता रहा है, लेकिन ममता को सोचना होगा कि देश से बढ़कर कुछ नहीं है। आज नहीं तो कल यह बात जितनी जल्‍द ममता समझ जाएं उतना ही देशहित में होगा।