आध्यात्मिक शक्तियों से ही भारत रहा विश्वगुरु : मोहन भागवत जी

दिंनाक: 22 Mar 2018 17:21:07


भोपाल(विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत जी ने बुधवार शाम मऊसहानियां में शौर्य और साहस के प्रतीक बुन्देल केशरी महाराजा छत्रसाल की 52 फिट ऊंची अष्टधातु की अश्वारोही प्रतिमा का समारोह पूर्वक अनावरण किया। इस अवसर पर देश के 16 जाने-माने संतों ने समारोह को गरिमा प्रदान की। समारोह में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने के कारण पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। 
    संघ प्रमुख श्री भागवत जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ छत्रसाल शौर्य पीठ में स्थापित प्रतिमा का अनावरण करने के बाद कहा कि महाराजा छत्रसाल ने जिस तरह नि:स्वार्थ भाव से सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर उद्याम किया। उसी से हमारी संस्कृति सुरक्षित है। हमें इस अवसर पर उनकी राह पर चलने का संकल्प लेना होगा। अनादिकाल से भातर में आध्यात्मिक शक्तियों का देश को बहुमुखी स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर बनाने की चर्चा तो की लेकिन मंदिर निर्माण की तिथी नहीं बताई। 

महाराजा छत्रसाल शौर्य प्रतिमा का सरसंघसंचालक मोहन भागवत जी ने किया भव्य अनावरण

श्री भागवत ने कहा कि भगवान श्री राम अनंत और शास्वत हैं। समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आकर देश और समाज को दिशा देने का काम भारत के अलावा अन्यंत्र कहीं नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड की इस भूमि में महाराजा छत्रसाल के आदर्श को जीवित रखने का यह प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सत्य को अनुकूल होता है वही जीता है और उसके लिए ही तपस्या करनी पड़ती है। इसी कारण हम छत्रसाल का स्मरण कर एक गौरव गाथा को स्थापित कर रहे हैं। लेकिन हम भी छत्रसाल जैसे बने यह प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि आज भी यह सब हो सकता है जो उन्होंने किया। सत्य रहे, असत्य जाय, धर्म रहे, अधर्म जाय जब हम उस सत्य के योग बन जाते हैं तो सब कुछ होता हुआ देखते हैं। महाराजा छत्रसाल ने इतना उद्यम अपने लिए नहीं किया। केवल छत्रसाल ही नहीं महाराणा प्रताप, शिवाजी आदि अन्य महापुरूषों ने यह सब धर्म की स्थापना के लिए किया था क्यों कि धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहेगी तभी दुनिया रहेगी। इसलिए इस समाज को सुरक्षा रखना है। महाराजा छत्रसाल ने जितना महान त्याग इस क्षेत्र के लिए किया उसका थोड़ा सा भी अंश हम अपने जीवन में ग्रहण कर लें तो क्षेत्र का कल्याण हो सकता है। उन्होंने जो धर्म बताया उसे स्वयं जिया। उनके मन में स्वार्थ, अहंकार, भय, मजबूरी कुछ भी नहीं था। बस केवल एक बात थी देश, समाज, धर्म और संस्कृति को सुरक्षित रखना है। 
    सरसंघ चालक श्री भागवत ने कहा कि कोई भी नेता, सरकार और पार्टी से समाज की उन्नति नहीं होती, वह सहायक हो सकते हैं। पूरा समाज जो सोचता है वही होता है। इसलिए पूरे समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सारे समाज को जोडक़र पराक्रम करना पड़ेगा। भाषा, जाति, पंथ, संप्रदाय के बावजूद सब में एक भाव होना चाहिए। तभी देश को समतायुक्त और शोषण मुक्त बनाया जा सकेगा। 
राम मंदिर इच्छा नहीं संकल्प
    संघ प्रमुख श्री भागवत जी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि राम जी का मंदिर बनना है यह इच्छा नहीं संकल्प है और इस संकल्प को हम पूरा करेंगे। लेकिन उन्होंने मंदिर निर्माण की कोई तिथि नहीं बताई। इशारों-इशारों में उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण की बात 1986 से चल रही है। लेेकिन कठिनाई यह है कि जिन्हें राम मंदिर बनना हैं उन्हें खुद राम के योग बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण में शंका का कोई कारण नहीं है। सारी परिस्थितियां ठीक होने से मंदिर निर्माण का समय आ गया है। अपने 28 मिनिट के उद्बोधन में संघ प्रमुख ने हिन्दू समाज को एकता के सूत्र में बांधने का जिक्र करते हुए महाराजा छत्रसाल, महाराणा प्रताप, शिवाजी सहित अनेक पराक्रमी योद्धाओं  का कई बार स्मरण किया। अयोध्या में राम मंदिर का जिक्र आते ही पण्डाल में जयश्रीराम के नारे गंूजने लगे। 
पूरे देश में पढ़ाए जाएं महाराजा छत्रसाल 
    इस अवसर पर मूलक पीठाधीश्वर वृंदावन के डॉ. राजेन्द्र दास देवाचार्य महाराज ने कहा कि मध्यप्रदेश ही नहीं पूरे देश में महाराजा छत्रसाल को पाठ्यक्रम में शामिल कर पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप और शिवाजी की तरह महाराजा छत्रसाल ने भी अपने पुरूषार्थ से बुन्देलखण्ड की सीमाओं का विस्तार ही नहीं किया बल्कि औरंगजेब के कार्यकाल में उसे स्थापित किया। उन्होंने मुगलों की दस्तां को स्वाभिमान पूर्वक अस्वीकार किया। महाराज ने कहा कि कुछ लोगों ने इतिहास के प्रति अक्षद्य अपराध किए हैं। चंपत राय और महाराजा छत्रसाल को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया। भारत सरकार को इस झूठे इतिहास का अमान्य कर उनका गरिमामय इतिहास सामने लाना चाहिए। 
इनका हुआ सम्मान
    महाराजा छत्रसाल शोध संस्थान द्वारा लोक गायन के माध्यम से बुन्देलखण्ड की याति फैलाने पर प्रसिद्ध लोकगीत गायक देशराज पटैरिया, लेखन कार्य के लिए डॉ. बहादुर सिंह परमार, सतना के शिक्षाविद् शंकर दयाल भारद्वाज, महाराजा छत्रसाल के नाटय मंचन करने पर शिवेन्द्र शुक्ला, महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा का निर्माण करने वालों में फिरोज खान, शंकर कुमार, अमर पाल तथा मूर्तिकार दिनेश शर्मा को शॉल और सम्मान पत्र भेंट कर स मानित किया गया। प्रारंभ में संस्थान के सचिव राकेश शुक्ला राधे ने स्वागत भाषण देते हुए शोध संस्थान की 3 साल की यात्रा मे ंप्रकाश डाला। अंत में संस्थान के अध्यक्ष भगवत शरण अग्रवाल ने आभार ज्ञापित किया। 
हाईवे दिन भर रहा बंद
    रीवा-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर मऊसहानियां में कार्यक्रम होने के कारण सुरक्षा कारणों के चलते प्रशासन ने आज सुबह से ही छतरपुर से नौगांव की ओर जाने वाले रास्ते पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया था जिससे यात्री बसों और ट्रकों को देवपुर, लुगासी या गढ़ीमलहरा लुगासी होकर 20 किमी का चक्कर लगाकर जाना पड़ा। 
कदम चप्पे-चप्पे पर थी सुरक्षा
    संघ प्रमुख मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा होने के कारण छतरपुर से मऊसहानियां और मऊसहानियां से नौगांव तक चप्पे-चप्पे पर सुरक्ष बल के जवानों को तैनात किया गया था। कार्यक्रम में स्थल में प्रवेश भी कड़ी सुरक्षा जांच के बाद दिया गया।