कल ,आज और कल का संगम ही है" कुटुम्ब "

दिंनाक: 26 Mar 2018 16:47:44
भोपाल(विसंके)कल, आज और कल का संगम ही कुटुम्ब कहा जाता है, जब तीन पीढियां एक साथ जीवन जीती हैं. आपसी समझ, संहयोग, समन्वय के साथ एक दूसरे के प्रति प्यार चिंता और दायित्व बोध के साथ मिलकर रहती हैं. एक-दूसरे के दोष सहज ही स्वीकारती हैं, समझती हैं और सतत् सुधार के सार्थक प्रयासों में रत रहती हैं तभी एक परिवार और कुटुम्ब का निर्माण होता है. नई पीढी घर से दूर अन्य शहरों में और विदेशों में रह रही है, परन्तु वह हर अवसर, पर्व पर मूल घर जाना चाहती है. अर्थात् दूरियों के चलते भी परिवार एक रीति-नीति का पालन भी परिवार को बाँधे रखतो है और दूरियों के रहते भी कुटुम्ब का अस्तित्व कायम रह सकता है.

लम्बे वक्त तक संयुक्त परिवार के दीर्घकालीन रहने के उपाय -

(1) समय समय पर एक साथ आना व मनोरंजन का रास्ता निकालना - ताकि बातचीत हो और मन का मुटाव खत्म हो. महीने में कम से कम एक बार सभी परिवार वाले इकट्ठे बैठकर कीर्तन-भजन करना चाहिए.

(2) वार्षिक बजट में सभी छोटे-बडों को समान अधिकार व मान देना.

(3) अगर संभव हो तो सभी परिवार वालों को भोजन इकट्ठा बैठ कर करना चाहिए अन्यथा महीने में कम से कम एक- दो बार सभी परिवार वालों को सामूहिक भोजन करना चाहिए.

(4) सभी कामों को आपस में बाँटकर करना ताकि - भविष्य में अलग हो भी न सकें. जैसे- सभी भाई या परिवारजन आपस में तय करें कि कौन रिश्तेदारी-समाज के सुख-दुःख में आना-जाना निभाएगा. कौन घर के कार्य -फल सब्जी व अन्य करेगा, कौन- शेष समस्त छोटे बडे कार्य, परिवार को एक रखने के लिये समस्या का समाधान करेगा. घर का तथा जो भी अन्य खर्चा होगा सभी आपस में बाँट लेंगे. अगर कोई भाई परिवार में कमजोर है तो उसका व उसके परिवार का खर्चा भी बाकि के समर्थ भाई उठाएंगे.

पूज्य पिता जी से सीखें 

  1. लेने से पहले देने का विचार करें
  2. आप अपना बीज बोएं, फल ने देखें
  3. तोडना नहीं जोडना सीखों और त्याग करों

4.संसार में गुलाब बनकर जिया कांटा बनकर रूकावट मत बनों.

साभार:- पथिक संदेश