राष्ट्रीय सेविका समिति की द्वितीय प्रमुख संचालिका सरस्वती ताई आप्टे

दिंनाक: 27 Mar 2018 17:42:22


भोपाल(विसंके).1925 में हिन्दू संगठन के लिए डॉ. हेडगेवार जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया. संघ की शाखा में पुरूष वर्ग के ही लोग आते थे. उन स्वयंसेवक परिवारों की महिलाएँ एवं लडकियाँ डॉ. हेडगेवार से कहती थीं कि हिन्दू संगठन के लिए नारी वर्ग का भी योगदान लिया जाना चाहिए.
डॉ. हेडगेवार चाहते तो थे परन्तु शाखा में लडके एवं लडकियों का एक साथ खेलना उन्हें व्यवहारिक नहीं लगता था. वह चाहते थे कि यदि कोई महिला नारी वर्ग के लिए अलग संगठन चलाए,
तभी ठीक होगा. उनकी यह इच्छा श्रीमति लक्ष्मी बाई केलकर द्वारा राष्ट्र सेविका समिति के नाम से अलग संगठन बनाकर पूरी हुई. इस संगठन की कार्य प्रणाली लगभग संघ जैसी ही थी. आगे चल कर श्रीमती लक्ष्मी बाई केलकर समिति की प्रमुख संचालिका बनीं. 1938 में ताई आप्टे की भेंट केलकर से हुई. मौसी जी से मिलकर ताई आप्टे के जीवन का लक्ष्य निश्चित हो गया. दोनों ने मिलकर राष्ट्र सेविका समिति के काम को व्यापकता एवं एक मजबूत आधार प्रदान किया 1945 में समिति का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ. ताई आप्टे की सादगी, संगठन क्षमता, कार्यशैली, कौशल को देखर मौसी जी ने इस सम्मेलन में उन्हें प्रमुख कार्यवाहिका की जिम्मेदारी दी. जब तक शरीर में शक्ति रही, ताई आप्टे ने इसे भरपूर निभाया. पूर्व सिंध के हैदराबाद में विभाजन से कुछ समय पूर्व वहाँ की कठिन परिस्थिति को देखते हुए अपनी सेविका की पुकार पर मौसी जी सारा कार्य ताई आप्टे के सौप कर वहाँ चल दीं. उन्होंने सेविकाओं को अन्तिम समय तक डटे रहने और किसी भी कीमत पर अपने सतीत्व की रक्षा का संदेश दिया. 1948 में गांधी जी की हत्या के उपरान्त संघ पर जब प्रतिबन्ध लगा तो हजारों कार्यकर्ता जेलों में भर दिए गये. ऐसे में उन परिवारों में महिलाओं को धैर्य बँधाने का काम राष्ट्र सेविका समिति ने किया. 1962 में चीन के आक्रमण के समय समिति ने घर-घर जा कर पैसा एकत्र किया और रक्षा मंत्री को भेंट किया. 1965 में आक्रमण के समय भी फौजी जवानों के लिए रेल स्टेशनों पर चाय एवं भोजन की व्यवस्था की. इन सब कार्यों की सूत्रधार सरस्वती सताई आप्टे थीं. उन्होंने हजारों सेविकाओं को सिखाया कि गृहस्थी के साथ भी देश सेवा कैसे की जा सकती है.