'बुजुर्गों की तरह बच्चों का करें सम्मान'

दिंनाक: 28 Mar 2018 19:36:47


भोपाल(विसंके). बाल संरक्षण आयोग के तत्वावधान में बाल अधिकारों के संबंध में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा सह कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि बच्चों के लिए कोई भी काम दिल और दिमाग दोनों से करना चाहिए। हम जिस प्रकार बुजुर्गों का सम्मान करते हैं, उसी तरह बच्चों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। हमारा विकास तभी संभव है, जब हम करनी और कथनी के बीच अंतर को समाप्त कर लेंगे। समन्वयक भवन में आयोजित कार्यशाला में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम पर विमर्श किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता बालिका सोनिया प्रजापति ने की। सोनिया की पहचान बाल पंचायत का गठन कर बच्चों की समस्याएं उठाने के लिए है। सोनिया प्रजापति को एक दिन (28 मार्च) के लिए बाल आयोग का अध्यक्ष भी बनाया गया है। कार्यशाला में तैराक दिव्यांग बालक अब्दुल कादिर इंदौरी, ध्रुव आचार्य एवं श्रेयांश बालमाटे भी उपस्थित रहे। श्रेयांश बालमाटे ने अपने गीतों की प्रस्तुति दी।


           


 उद्घाटन सत्र में मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज बच्चों से बचपन दूर होता जा रहा है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि बच्चे अपनापन महसूस करें। हमारी सरकार अनाथ बच्चों के लिए ऐसे प्रयास कर रही हैं कि बच्चों को आदर्श अनाथालय मिलें, जिससे उन्हें घर जैसा माहौल मिल सके। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के पालन पोषण के लिए परिवार की जरूरत होती है और वैसा माहौल हम हर बच्चे को देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को चांद-सितारे छूने देने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि एवं सहकारिता राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने बाल संरक्षण और शिक्षा के अधिकार पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यबोध भी होना चाहिए। कर्तव्य और अधिकार को अलग करके नहीं देखा जा सकता है। यह दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। जिन्हें अधिकार प्राप्त है, उन्हें कर्तव्य का बोध होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयोग का कार्य है कि वे केवल बंद दरवाजों के भीतर अध्यक्ष और सदस्यों की बैठक नहीं है। आयोग का कार्य है कि जिन लोगों के लिए आयोग का निर्माण किया गया है उनके लिए कार्य करे। मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग इस मामले में खरा उतरा है। मंत्री सारंग ने कहा कि जब बाल संरक्षण जैसे मुद्दे सुलझेगा, तभी इक्कीसवीं सदी हिन्दुस्तान की होगी। इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि चाइल्ड फ्रेंडली मध्यप्रदेश की बात की।

            कार्यशाला के समापन सत्र में सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि मध्यप्रदेश के आयोग ने बच्चों के क्षेत्र में कार्य करके अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने अब्दुल कादिर और श्रेयांश का उदाहरण देते हुए कहा कि यह बच्चे समाज के लिए प्रेरणा हैं। इन बच्चों ने बताया कि कोई भी बीमारी या अन्य बाधा आगे बढऩे से रोक नहीं सकती। उन्होंने कहा कि बच्चों के अंदर ऐसा आत्मविश्वास उत्पन्न करना चाहिए कि वे ध्रुव और प्रह्लाद जैसे बन सकें। उन्होंने कहा कि समाज में बच्चों के लिए अपनापन का वातावरण कम हो रहा है। अपनापन कम होने से ही असामाजिक घटनाएं घटित हो रही हैं। मंत्री आर्य ने बताया कि कानून केवल अपराध रोक सकता है, लेकिन व्यक्ति के अंदर के रावण को अपनेपन से हराया जा सकता है।

            


कार्यशाला में बच्चों की सुरक्षा एवं उनसे जुड़े अपराधों पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर ने कहा कि आज बच्चों से जुड़े अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि हम अपने बच्चों को अपने आस-पड़ोसियों से, रिश्तेदार से परिचित नहीं कराते। बचपन में हुई हिंसा या घटना हमेशा याद रहती है, क्योंकि इस समय दिमाग विकसित हो रहा होता है। यदि परिचय होता भी है तो उसे वो निभाते नहीं है। यही कारण है कि 100 में से 97 बाल अपराध बच्चों के जान परिचित ही करते हैं। पुलिस, समाज में एक समन्वयक की तरह होती है। समाज का अंग तो होती है लेकिन साथ ही में समन्वयक भी होती है। पुलिस को चाइल्ड फ्रेंडली होना चाहिए लेकिन उसे जनरल फ्रेंडली भी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के हिंसा के विरोध में सुर उठाना जरूरी है। यदि विरोध में सुर नहीं उठाएंगे तो यह हिंसा विकराल रूप धारण कर लेगी। विरासत हमें मिलती तो है लेकिन इसे हमें विरासत के रूप में बच्चों को सौंप कर जाना चाहिए। बच्चों का भूख से मरना उतनी बड़ी न्यूज नहीं बनती, जितनी बड़ी न्यूज यौन अत्याचार से पीडि़त बच्चे की बनती है। सभी को अपने दायित्व के साथ-साथ शासकीय दायित्वों को सामाजिक दायित्व बनाकर चलना चाहिए। इसके साथ ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत भूषण और आईजी केसी जैन ने भी किशोर न्याय के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं, बच्चों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग कैसे होनी चाहिए, इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार शरद द्विवेदी ने बताया। वहीं, डॉ. विश्वास चौहान ने जेजे एक्ट के संबंध में महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध को लेकर जेजे एक्ट में अच्छे से उल्लेख नहीं है। जेजे एक्ट में साइबर अपराध को स्पष्ट करने के साथ ही विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों को बाँट देना उचित होगा।