आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 29 Mar 2018 14:02:23


भोपाल(विसंके). आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है. असली शत्रु अपने भीतर रहते हैं. वे शत्रु हैं – लालच, द्वेष, क्रोध, घमंड और आसक्ति और नफरत.


      - भगवान महावीर