संविधान साक्षरता का अभियान पूरे देश में चलाना चाहिए - श्री पतंगे

दिंनाक: 12 Apr 2018 14:39:28


भोपाल(विसंके). भारतीय संविधान एवं कानून का पालन देश के प्रत्येक नागरिक को करना चाहिए। भारतीय संविधान की जानकारी सभी को होना चाहिए। इसके लिए एक व्यापक संविधान साक्षरता की आवष्यकता है। यह विचार प्रख्यात पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक श्री रमेश पतंगे ने व्यक्त किए। वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में बाबा साहब डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर जयंती प्रसंग पर ‘‘बाबा साहब आम्बेडकर और भारतीय संविधान‘‘ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में बोल रहे थे।


               इस अवसर पर श्री पतंगे ने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के विकास के लिए सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि  डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने संविधान निर्माण की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में देश को एक ऐसा संविधान दिया जो देश के प्रत्येक नागरिक के उत्थान की बात करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर यह मानते थे कि विविधता से भरे इस विशाल देश में सभी नागरिकों के हितों के संरक्षण की बात भारतीय संविधान में होनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। देश के सभी नागरिकों में संविधान के प्रति गहरी आस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान को समझने के लिए संविधान के दर्शन को समझना होगा, क्योंकि संविधान के प्रत्येक शब्द का अर्थ व्यापक है। उन्होंने कहा कि इस देश में जो जन्मा है, उसे पूरे आत्म सम्मान एवं समानता के साथ जीने का पूर्ण अधिकार है और यह अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रत्येक नागरिक को प्राप्त होते हैं।

               इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि इस देश को आधुनिक लोकतंत्र बनाने में बाबा साहब आम्बेडकर का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने आधुनिक लोकतंत्र के लिए स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुत्व की भावना को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर के प्रयासों से ही अनेक श्रमिक संगठन एवं युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का गठन हुआ है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने कहा कि डॉ. भीमराव आम्बेडकर को आम्बेडकर नाम उनके गुरू ने दिया था। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी,  विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों सहित विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक श्री अरूण खोबरे ने किया।