आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 16 Apr 2018 18:27:38


हमारे देश और समाज के माथे पर एक कलंक है – अस्पृश्यता हिन्दू समाज के, धर्म के ,रास्त्र के करोड़ों हिन्दू बन्धु इससे अभिशप्त हैं. जब तक हम ऐसे बनाए हुए हैं, तब तक हमारे शत्रु हमें परस्पर लदवाकर, विभाजित क्र सफल होते रहेंगे. इस घातक बुराई को हमें त्यागना ही होगा.

      -  वीर सावरकर