अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक - डॉ.राघवेन्द्र शर्मा

दिंनाक: 23 Apr 2018 18:46:43


भोपाल(विसंके). अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत कोलार द्वारा ग्राहकों के हितों के संरक्षण हेतु कार्यरत राष्ट्रव्यापी संगठन शिक्षा क्षेत्र में व्यापक कठिनाईयों और असुविधाओं को दूर करने के लिए व्यवस्था सुधार का आंदोलन निरंतर चला रही है।
                श्री राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों की किसी भी प्रकार की समस्या को पूरी ताकत के साथ कानून के दायरे में रहकर शिकायत करें और उसकी चिंता न करें कि बच्चों को स्कूल से निकाल दिया जायेगा। श्री शर्मा ने अभिभावकों से आव्हान करते हुए कहा कि मेरा फोन नंबर और डाक पता अवश्य लिख लें जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर आप मुझे पत्र लिख सकते है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभिभावकों की किसी भी प्रकार की समस्या को पूरी तरह निराकरण करने का प्रयास किया जायेगा।
श्री प्रबोध पंड्या ने कहा कि अभिभावक जागरूक होंगे तो बच्चे जागरूक बनेंगे और बच्चें जागरूक होंगे तो देश जागरूक होगा। प्रायवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली रोकने के लिए हम सबको मिलकर लड़ना होगा। आज हम सब मिलकर साथ लड़ेंगे तो प्रशासन जागेगा। जिससे यह सभी प्रायवेट स्कूल कानून के दायरे में आ सके।


                इस अवसर पर बच्चों के हितों, समस्याओं और शोषण रोकने के लिए ‘‘बाल उपभोक्ता इकाई’’ का गठन किया गया है। जिसके अध्यक्ष श्री राहुल चावरिया, उपाध्यक्ष श्रीमती प्रगति शुक्ला, सचिव श्री श्रेयांश बारी, सह सचिव सुश्री हर्षिता यादव तथा सदस्य सनसंती गौर, आकाश कुशवाह को मनोनीत किया गया है।

                ज्ञापन में मांग की गयी है कि राज्य और केन्द्र शासित सभी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाए। जिससे अभिभावकों को आसानी से और कम कीमत में पुस्तकें उपलब्ध हो सके। साथ ही शिक्षण शुल्क की अनिवार्यता के अलावा कोई अन्य फीस शामिल नहीं होना चाहिए। पूरी फीस डिजीटल तरीके से ली जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी। अभिभावकों से डॉयरी, फीस कार्ड, स्पोर्ट फीस, मेंटनेंस फीस, डिजिटल एवं स्मार्ट क्लास फीस, कम्प्यूटर फीस, संगीत क्लास फीस, मैगजीन फीस, एक्टीविटी फीस की अनुचित मांगों के साथ अन्य तरह की फीस पर त्वरित रोक लगायी जाना चाहिए। निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा को सेवा नहीं समझने वाली संस्थाओं को व्यावसायिक श्रेणी में शामिल करके उसे जीएसटी के दायरे में लाए जाने की मांग की।

                बच्चों ने मांग की है कि बस्ते के भारी बोझ को कम किया जाए, जिससे उनका पीठ दर्द कम हो सके। कक्षाओं में बच्चों की संख्या निर्धारित होना चाहिए। अत्यधिक बच्चे होने के कारण शिक्षक का ध्यान नहीं जाता है। बच्चों के साथ होने वाली मारपीट, अत्याचार, यौन शोषण के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई जाना चाहिए।