दलित सन्यासी को जूना अखाड़ा ने बनाया महामंडलेश्वर

दिंनाक: 25 Apr 2018 17:06:12


भोपाल(विसंके). अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में शामिल जूना अखाड़े ने एक दलित संत को धर्माचार्य की बड़ी पदवी देने की घोषणा की है. सनातन संस्कृति के इतिहास में किसी दलित को महामंडलेश्वर उपाधि देने का अखाड़े का यह पहला निर्णय है.

चंडीगढ़ में ज्योतिष विज्ञान केन्द्र से शिक्षा प्राप्त दलित महामंडलेश्वर कन्हैया प्रभुनंद गिरी ने  न्यूज18 से खास बातचीत में बताया कि जीवन में सर्व धर्म की एकजुटता ही उनका पहला कर्तव्य है. आजमगढ़ के मूल निवासी कन्हैया प्रभुनंद गिरी ने कहा कि सनातन धर्म में कोई जाति नहीं होती और सभी जाति और धर्म के लोगों को बराबर का दर्जा हासिल है.

कन्हैया प्रभुनंद गिरी बताते हैं कि उनके अंदर शुरू से ही पूजा-पाठ और अध्यात्म के प्रति रूचि थी इसलिए उनके अंदर भी जिज्ञासा हुई क्यों न वो भी धर्म गुरू बने. यही कारण था कि वर्ष 2013 में ज्योतिष शास्त्र में शिक्षा लेने के बाद वो पूरी तरह समाज के कार्यों में जुट गए और देश के कोने-कोने में जाकर समाज के हर वर्ग को धर्म का संदेश देने में जुट गए.

बकौल कन्हैया प्रभुनंद गिरी, मेरा शुरू से जूना अखाड़ा से जुड़ाव रहा इसलिए जूना अखाड़ा के संत पंचानन गिरी के पास जाकर उनसे शिक्षा ग्रहण किया. वर्ष 2016 में कुम्भ में जूना अखाड़ा के संत पंचानन गिरी ने मुझे सन्यासी की दीक्षा दी. पहले मेरा नाम कन्हैया कुमार कश्यप था, लेकिन सन्यासी होने के बाद मेरा नाम बदलकर कन्हैया प्रभुनंद गिरी रखा गया.

दलित समाज के लोगों को संदेश देने की मंशा रखने वाले कन्हैया प्रभुनंद गिरी को 'महामंडलेश्वर' की उपाधि देने की घोषणा करने के बाद उनका नाम शिवानंद गिरी रखा गया है. 'महामंडलेश्वर' ने कहा कि जो सपना उन्होंने बचपन में देखा था वो आज साकार हो गया.

दलित समाज के उत्थान के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनैतिक पार्टी दलित समाज को तोड़ने का काम कर रहे है. उनमें पैदा बिखराव कर रहे है. उन्होंने कहा कि उनका दलित समाज से सिर्फ इतना ही कहना है कि वो लोग वेद-पुराण पढ़ें और वो भी बड़े-बड़े पदों पर विराजमान हो सकते है, जिससे समाज का भला होगा.

दलित संत का कहना है कि उन्होंने कभी जीवन में ऐसी कल्पना नहीं की थी कि अनुसूचित जाति से होने के बाद भी बड़े धर्माचार्य के पद पर कभी आसीन हो सकते हैं. हालांकि शुरु से ही हिन्दू धर्म के ग्रन्थों में गहरी रूचि रखने वाले कन्हैया कुमार कश्यप ने संस्कृत विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. उसके बाद उन्होंने वर्ष 2016 के उज्जैन से सिंहस्थ कुंभ में पंचानन गिरी से दीक्षा लेकर संन्यास लिया.

कन्हैया प्रभुनंद गिरी अब सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को जीवन का उद्देश्य बताते हुए ऐसे लोगों की घर वापसी का संकल्प लिया है, जिन्होंने किन्हीं प्रलोभनवश हिन्दू धर्म को छोड़कर कोई दूसरा धर्म अपना लिया है.