'समाज में पत्रकारिता का सृजनात्मक हस्तक्षेप आवश्यक'

दिंनाक: 26 Apr 2018 14:58:27


भोपाल(विसंके). मीडिया आज पूरे विश्व में यथार्थ की रचना करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है। मीडिया में यह शक्ति है कि वह समाज के मानस को प्रभावित भी कर सकता है और मानस बना भी सकता है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सृजनात्मक हस्तक्षेप हो। समाज में एक अच्छा परिवेश बने, इसके लिए नयी पीढ़ी को सृजनात्मक पत्रकारिता के लिए आना चाहिए। यह विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने व्यक्त किए। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के वार्षिकोत्सव प्रतिभा-2018 के पुरस्कार वितरण समारोह में वे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में फिल्मकार श्री राजेन्द्र जांगले और वरिष्ठ पत्रकार शरद द्विवेदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति श्री जगदीश उपासने ने की। इस अवसर पर विजेता विद्यार्थियों को अतिथियों ने पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र दिए।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता की दुनिया सरल नहीं है, बल्कि कांटों भरी है। तमाम दबाव और प्रलोभन आते हैं। इन सबसे बचते हुए हमें आगे बढऩा चाहिए। आज मीडिया की बहुत आलोचना होती है, किंतु हमें याद रखना चाहिए कि तमाम आलोचनाओं के बीच मीडिया ने समाज हित में कई आंदोलनों को मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हमारा सामाजिक परिवेश बन रहा है, उसमें हमें यह विचार करना चाहिए कि हम क्या करें और क्या न करें। प्रो. मिश्र ने कहा कि जिसमें लोक कल्याण का भाव हो, हमें उसी कार्य को करना चाहिए। किस तरह के समाचार को प्रकाशित-प्रसारित किया जाए और किस तरह के समाचार को रोका जाए, आज यह विचार करने की आवश्यकता है। प्रो. मिश्र ने कहा कि युवाओं के दिल में भारत बसता है। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति से बताया है कि समाज के प्रति उनके मन में गहरी संवेदनाएं हैं। निश्चित ही यह युवा अपनी कलम के माध्यम से भारत की विरासत और संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे।
सोशल मीडिया का संभलकर करें उपयोग : प्रो. मिश्र ने कहा कि सोशल मीडिया एक तरह से व्यक्तिगत मीडिया है। यहाँ हम बिना किसी दायित्व के कुछ भी साझा करते हैं। बाद में उसका प्रभाव समझ में आता है। अनेक अवसर पर सोशल मीडिया में साझा की गई हमारी सामग्री समाज पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़ती है।  इसलिए जब भी हम सोशल मीडिया में कोई प्रतिक्रिया दें, तो बहुत सावधानी रखें।


जीतने के भाव से प्रतियोगिता में हों शामिल :
कुलपति श्री जगदीश उपासने ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हमें प्रत्येक प्रतियोगिता में जीतने के भाव से शामिल होना चाहिए। जीवन की किसी भी प्रतियोगिता में जीतने के लिए आवश्यक तत्व हैं- रुचि, जुड़ाव और समर्पण। यह तत्व होंगे तो हम हर विधा में विजय प्राप्त करेंगे। मीडिया को भी स्पद्र्धा की तरह लिया जाना चाहिए। श्री उपासने ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि हमें अपने दिल-दिमाग की खिड़कियां खुली रखनी चाहिए, ताकि विविध विचार आ सकें और इसके साथ ही अपने पैर जमीन पर रखना चाहिए। सब विचारों को समझ कर ही हम जीवन में विजय प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श्री शरद द्विवेदी और श्री राजेन्द्र जांगले ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर श्री जांगले के निर्देशन में तैयार की गई डॉक्युमेंट्री 'चंदेरीनामा' का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा भी उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने किया और कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजीव गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विजेता विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की पत्रिका ‘मीडिया नवचिंतन’ के ज्ञान संगम पर केन्द्रित अंक और विद्यार्थियों द्वारा प्रतिभा-2018 पर केन्द्रित एमसीयू समाचार पत्रिका का विमोचन किया गया।