सांस्कृतिक संध्या के साथ सम्पन्न हुआ 15 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर

दिंनाक: 16 May 2018 17:09:57


भोपाल(विसंके). राष्ट्रऋषि नानाजी का ध्येय वाक्य- ‘‘ हम अपने लिये नहीं अपनों के लिये हैं, अपने वे हैं जो पीड़ित और उपेक्षित हैं‘‘। इस ध्येय वाक्य को व्यवहारिक दृष्टि से मूर्तरूप देने के लिये ऋषि, मृत्यु पर्यन्त सक्रीय रहे सन् 2010 में ऋषि ने अपना भौतिक शरीर छोड़ा, जिसे उनकी इच्छानुसार दधीचि देहदान संस्थान दिल्ली को समर्पित कर दिया गया। भारत माता के इस बीर कर्मठ सपूत द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं ग्रीष्मावकाश में उनके मनोंरजन की दृष्टि से 2001 में व्यक्तित्व विकास शिविर का श्री गणेश किया, तब से प्रतिवर्ष इस शिविर के माध्यम से चित्रकूट क्षेत्र की 50 किमी. की परिधि के बच्चे कुशल प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विविध कलाओं में दक्ष होकर शिविर से जाने के बाद अपने गांव एवं आस-पास के बच्चों को संस्थान के समाज शिल्पी दम्पतियों के मार्गदर्शन में बाल-संस्कार शिविर के माध्यम से व्यक्तित्व विकास शिविर में सीखे विविध कलाओं का प्रशिक्षण देते हैं। 
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित रामनाथ आश्रमशाला परिसर में 1 मई से प्रारम्भ व्यक्तित्व विकास शिविर का आज 15 मई को शिविरावधि में समाज के विविध वर्गों से आये बच्चों द्वारा सीखी गयी कलाओं का प्रदर्शन सांस्कृतिक संध्या के अन्तर्गत हुआ। 15 दिवसीय इस व्यक्तित्व विकास शिविर के समापन सत्र की अध्यक्षता चित्रकूट कामदगिरी प्रवेश द्वार के महन्त परम्पूज्य श्री मदन गोपाल जी ने की एवं मुख्य अतिथि के दायित्व निर्वाहन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कानपुर प्रान्त के सहप्रान्त संघचालक ने किया। समापन सत्र सद्गुरू सेवा संघ ट्रष्ट के ट्रष्टी श्री वी.के. जैन, बांदा सांसद श्री भैरों प्रसाद मिश्र, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती रंजना उपाध्याय के साथ-साथ चित्रकूट अनेक गणमान्य नागरिकों के साथ दीनदयाल शोध संस्थान के चित्रकूट प्रकल्प के संगठन सचिव श्री अनिल मिश्र, सचिव डा0 अषोक पाण्डेय उपमहा प्रबंधक डा0 अनिल जायसवाल के साथ सभी प्रकल्पों के कार्यकर्ता ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
दीप प्रज्ज्वलन एवं महापुरूषों के तैल चित्रों में माल्यार्पण के बाद अतिथि स्वागत एवं परिचय के साथ षिविर समापन कार्यक्रम की शुरूआत हुयी। बच्चों की प्रस्तुतियों में सर्वप्रथम सरस्वती बंदना के बाद विविध शारीरिक कलाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किये बच्चों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। शारीरिक प्रदर्शन को देखकर पूरा पण्डाल तालियों की गडगडाहट से गूँज उठा। इसी क्रम में अन्य प्रस्तुतियां - हारमोनियम, ढोलक, वाद्ययंत्रों के प्रदर्शन के साथ बच्चों ने सामूहिक देश गान एवं नृत्य से सबका मन मोह लिया।

                मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कानपुर प्रान्त के सहप्रान्त संघचालक श्री वीरेन्द्र चतुर्वेदी ने अपने विचार रखते हुये कहा कि राष्ट्रऋषि नानाजी हम सबके बीच में ही हैं, वे कहीं गये नहीं हैं। उनके द्वारा जो-जो भी रचनात्मक कार्य हॉथ में लिये गये वे देश में ही नहीं विदेशों में भी अनुकरणीय सिद्ध हो रहे है। ऐसे ऋषि द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान रूपी इस आश्रम के माध्यम से आप लोगों ने 15 दिन की इस अल्प अवधि में जो ज्ञान अर्जित कर उसका आज सबके बीच प्रदर्शन किया है, उससे मन प्रसन्न हो गया। आप सब जीवन में खूब प्रगति करें यही हार्दिक शुभकामनायें। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संत श्री मदन गोपाल जी ने कहा कि आप सब बच्चे बड़े सौभाग्यशाली हैं, जो इतनी कम उम्र में दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं के कुशल निर्देशन में प्रशिक्षित होकर इतना सुन्दर मन मोहक प्रदर्शन किये जिससे आत्मिक संतोष मिला। प्रभु कामतानाथ आप सबको जीवन में ढेर सारी सफलतायें दें जिससे आप अपने परिवार, गांव, जिला, राज्य एवं राष्ट्र का नाम रोशन करें। आपने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण के बारे में बच्चों का मार्गदर्शन करते हुये कहा मेरा भारत गांव में बसता है, गांव की राष्ट्र नीव है।
कार्यक्रम के अंत में इस 15 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर के शांति पूर्वक सम्पन्न करवाने में जिन-जिन कार्यकर्ताओं ने रात दिन लगकर प्रभु कृपा के साथ परिश्रम किया उन्हें एवं विविध क्षेत्रों से आये छोटे-छोटे बालक-बालिकाओं एंव उनके संस्कारित माता-पिता तथा समापन सत्र के अतिथियों एवं अन्य उपस्थित जन मानस का धन्यवाद ज्ञापन शिविर के पालक श्री हरीराम सोनी जी ने किया।