गाय का गोबर बना रोजगार का साधन - सुरेश राठौर

दिंनाक: 22 May 2018 17:01:12


भोपाल(विसंके). राष्ट्रऋषि नानाजी का व्यक्तित्व अति विशाल था. वे छोटे से छोटे एवं बड़े से बड़े व्यक्ति को अपने संवेदनशील ह्रदय एवं मृद वाणी से अपना बना लेते थे. कन्या कुमारी से कश्मीर तक विशाल भारत में कोई न कोई व्यक्ति उनका अपना था. प्रभु राम की तपस्थली चित्रकूट उनको अनुसुइया आश्रम के संत पूज्य भगवानानन्द जी की प्रेरणा खींच लायी. चित्रकूट के धर्मशालाओं एवं मंदिरों में आश्रय लेकर आपने यहाँ के विकास के लिए दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से कुछ रचनात्मक कार्य प्रस्तुत करने का उन्होंने प्रयास किया है. जिनमे से एक है, भारतीय नस्ल के गोवंश की संरक्षण एम संवर्धन से सम्बंधित प्रकल्प “गोवंश विकास एवं अनुसन्धान केंद्र, चित्रकूट”. जहाँ पर भारतीय नस्ल 14 प्रकार की प्रजातियों के 200 गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन की व्यवस्था है.
दीनदयाल शोध संस्थान ने चित्रकूट के 50 किमी की परिधि में आने वाले 512  ग्राम आबादियों को अपना कार्य क्षेत्र चुना है, इसलिए गौ संवर्धन केंद्र के माध्यम से इस क्षेत्र में भारतीय नस्ल के प्रचार-प्रसार की भी उचित व्यवस्था संचालित है. रामनाथ आश्रमशाला में विगत 1 मई से चल रहे व्यक्तित्व विकास शिविर में विभिन्न कलाओं के साथ शिविरार्थियों को भोपाल से आये गोवर शिल्पकार श्री सुरेश जी एवं उनके सहयोगी कुशल शिल्पकारों द्वारा बच्चों को उनके रूचि के अनुसार समूह बनाकर गोबर के सम्बन्ध में सामान्य जानकारी देने के साथ गोबर कला द्वारा विविध प्रकार के जीवनोपयोगी चीजों जैसे- घडी, फ्रेम, घड़ा, कलश, स्मृति चिन्ह, मूर्ति आदि.. बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण हेतु गोबर की आपूर्ति संस्थान के गोवंश विकास एवं अनुसन्धान केंद्र चित्रकूट द्वारा की जा रही है. प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत चित्रकूट के संत श्री सीताशरण महाराज के आशीर्वचन एवं शिल्पकारों के साथ “सच्चा धन है गोबर्धन, बाकी सब है धन-धन,”.. के सामूहिक गायन के साथ हुआ.
गोवर शिल्प का प्रशिक्षण देने के पीछे अपना हेतु बताते हुए श्री सुरेश राठौर जी द्वारा बताया गया कि समाज में निम्न आर्थिक स्तर वाले लोगों का स्तर उठाने एवं उनके आय साधन बढ़ने की दृष्टी से गोवर शिल्प बिना किसी लागत के अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हो सकता है. टीम के सदस्य गोवर शिल्पकार श्री अनिल बेचैन द्वारा बताया गया कि इस प्रशिक्षण के आलावा जब भी इस शिल्प का प्रशिक्षण देने या अन्य किसी प्रकार सहयोग गाँव के लोगों के लिए लगेगा उसके लिए वे हमेशा उपलब्ध रहेंगे.