गांव बंद आन्‍दोलन से मध्‍यप्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था को तोड़ने का षड्यंत्र : डॉ. मयंक चतुर्वेदी

दिंनाक: 24 May 2018 16:21:16


भोपाल(विसंके). पूर्ण कर्ज मुक्ति, सुनिश्चित आमदनी और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने के उद्देश्‍यों को लेकर एक से दस जून तक मध्‍यप्रदेश में किसान संगठन मिलकर गांव बंद आन्‍दोलन चलाने जा रहे हैं। जिसमें कि  किसान संगठन प्रत्‍येक ग्रामवासी से यह आग्रह कर रहे हैं कि वह अपना कोई भी सामान इन 10 दिनों तक शहर में बेचने न जाए। सुनने में यह बातें बहुत अच्‍छी लगती है ‍कि किसान संगठन सभी किसानों की समस्‍याओं को लेकर एक जुट हुए हैं, किंतु यह व्‍यवहार में पूरी तरह से अनुचित निर्णय कहा जाएगा। इससे एक तो गरीब किसान के परिवार पर आर्थ‍िक संकट आ खड़ा होगा, साथ में इस तरह का आंदोलन प्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था को कमजोर करने का भी काम करेगा।
 

किसान संगठन जिस तरह से कांग्रेस के साथ मिलकर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस आंदोलन से किसानों के नाम पर घेरने की कोशिश जो कर रहे हैं वह इसलिए भी उचित नहीं जान पड़ रही क्‍योंकि पिछले 13 सालों से मुख्‍यमंत्री रहते हुए उन्‍होंने जितने निर्णय किसानों के हित में लिए हैं, शायद ही उतने देश के किसी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री ने लिए हों, फिर यह गुस्‍सा किस बात का है? यह आक्रोश क्‍यों खड़ा किया जा रहा है, क्‍या सिर्फ इसीलिए यह सब हो रहा है क्‍योंकि इसी वर्ष मध्‍यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं और यह किसान संगठन इसी बहाने अपनी राजनीतिक इच्‍छाएं पूरी करने की मंशा रखते हैं।
सही अर्थों में किसान पुत्र शिवराज ने सत्‍ता संभालने के बाद प्रदेश में गांव, गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासियों सभी की कठिनाइयों को करीब से समझा है और उनके निराकरण के लिए प्रयास किए हैं। यही कारण है कि प्रदेश में गरीब उपेक्षित लोगों के कल्याण के प्रति सरकार जितनी पिछले 14 सालों से सजग दिखाई दी है उतनी वह उसके पूर्व पिछले वर्षों में कभी नहीं दिखी । मुख्‍यमंत्री शिवराज और उनकी घोषणाएं को लेकर भी यदि देखें तो भारत के वे सबसे अधिक घोषणाएं करनेवाले मुख्‍यमंत्री हैं तथा सभी विभागों में उन घोषणाओं पर सबसे अधिक अमल होनेवाला राज्‍य आज मध्‍यप्रदेश है।
 
वस्‍तुत: मध्‍यप्रदेश में जो पिछले दिनों किसानों के लिए हुआ और हो रहा है, उसके कुछ उदाहरण भी यहां देखे जा सकते हैं। जैसे कि आईसोपाम योजना, सघन कपास विकास योजना, सघन गन्ना विकास योजना, एकीकृत अनाज विकास कार्यक्रम (मोटा अनाज एवम चावल), अन्नपुर्णा योजना, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन एवं उर्वरकों का संतुलित व समन्वित उपयोग कार्यक्रम (आई. एन. एम.), बलराम ताल योजना, भू-जल संवर्धन योजना यह सभी किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार निरंतर सफलता से चला रही है।
 
इतना ही नहीं तो सूरजधारा योजना, मध्यप्रदेश कृषि में महिलाओं की भागीदारी (मापवा) योजना तथा स्व सहायता समूहों के लिए अन्‍य योजनाएं, आत्मा योजना, बैलगाड़ी योजना, बीज ग्राम योजना, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रशिक्षण योजना से लेकर मध्‍यप्रदेश में राष्ट्रीय बायोगेस योजना, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना, नदी घाटी, बाढ़ उन्मुख नदी योजना, नलकूप खनन योजना, राष्ट्रीय जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन , राष्ट्रीय  कृषि विकास योजना तक तमाम योजनाएं हैं जोकि सफलता पूर्वक आज संचालित की जा रही हैं। फिर भी प्रदेश का किसान परेशान है, यह बहुत आश्‍चर्य की बात है। क्‍या यह सरकार की कमी है या सरकार के जनकल्‍याणकारी कार्यों की कमी है जो किसान परेशान है?
 
सच में देखाजाए तो किसान सरकार की नीतियों एवं कार्यों से नहीं वह अपने लिए गए निर्णयों से ही अधिक परेशान हैं। व्‍यवहार में देखा यही जा रहा है कि एक किसान दूसरे किसान की नकल कर रहा है। यदि बगल के खेत में धान लगाई गई है तो हम भी धान लगाएंगे। टमाटर या प्‍याज के भाव अच्‍छे मिल रहे हैं तो हम भी इसे बोएंगे। लहसून के दाम अच्‍छे मिलेंगे क्‍यों कि आसपास के किसानों ने उसे लगाया है तो हम भी लगाएंगे। जब तक इस तरह का लालच से पूर्ण होकर खेती करने की मानसिकता रहेगी, सच यही है कि सरकार किसानों के हित में कितने भी प्रयत्‍न करलें, वे कभी भी समस्‍याओं से मुक्‍त नहीं हो सकते हैं। कारण किसी भी फसल के अधिक मात्रा में आ जाने  से उसका मार्केट दाम कमतर हो जाना है। 
 
वास्‍तव में सत्‍य यही है कि किसानों के साथ ही समाज के हर वर्ग तथा खासकर सामाजिक सरोकार से जुड़ी अनेक योजना मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से लेकर प्रदेश सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के विकास तथा कल्याण के लिए निरंतर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। किसानों की लागत को कम किया जा सके और उन्हें उनकी उपज का अधिक से अधिक मूल्य मिल सके, इसके लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण के साथ 10 प्रतिशत का अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है। साथ ही किसानों से समर्थन मूल्य पर उनकी उपज खरीदी जा रही है। इसी का यह परिणाम है कि मध्‍यप्रदेश के किसान पिछले 14 साल के भाजपा शासन में आर्थ‍िक रूप से बहुत मजबूत हुए हैं। फिर भी इस तरह के आंदोलनों का स्‍वरूप यहां खड़ा करने का जो प्रत्‍यत्‍न हो रहा है वो किसी आश्‍चर्य से कम नहीं है । 
 वास्‍तव में गांव बंद जैसे आन्‍दोलन राज्‍य अर्थव्‍यवस्‍था की कमर तोड़नेवाले ही सबित होते रहे हैं, यह न तो गांव के किसी व्‍यक्‍ति के हित में है और न ही शहरी व्‍यक्‍ति को ही इस आंदोलन से कोई लाभ होनेवाला है, हां कुछ किसान संगठन और उसके नेता जरूर इसकी आड़ में अपनी सौदेबाजी और राजनीतिक रसूख पाने में अवश्‍य कामयाब हो सकते हैं। 
अत: वक्‍त सभी के सावधान रहने का है और बिना किसी आंदोलन के सीधे समस्‍या होने पर सपाट मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात करने का है न कि अन्‍य किसी आन्‍दोलन के सहारे की अभी कोई आवश्‍यकता किसानों के बीच जान पड़ती है। इस पर विचार अब आगे मध्‍यप्रदेश के किसान भाईयों को ही करना है कि उनका इस आंदोलन को समर्थन देना कितना सही है ?