सुखी परिवार के सात सूत्र

दिंनाक: 26 May 2018 17:08:10


भोपाल(विसंके). सभी चाहते हैं कि हमारा परिवार सुखी हो. परिवार को सात सूत्र अपनाकर सुखी रखा जा सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लक्षण सात ही हैं. जैसे जैसे आप ओर नई बातें सीखें, आवश्यकतानुसार आप इसमें जोड़ते जाएँ.

  1. स्नेह :- परिवार में स्नेह भावना आवश्यक है परिवार ही स्नेह का सर्वोत्तम स्थान बने. जब परिवार में इसकी कमी होती है तो सदस्य घर से बाहर स्नेह कि तलाश करते हैं. जिसके कारण परिवार कि मजबूती ज्यादा नहीं रह पाती.
  2. समझ :- आपसी मतभेद के बावजूद एक दुसरे को समझने का प्रयास करना अति आवश्यक है. कई बार सदस्य एक दुसरे पर दोष लगाने लगते हैं. कि वे समझते नहीं या ये समझते नहीं. दोष लगाने से कुछ भला नहीं होता. समझ, प्रेम ओर विश्वास का बंधन है.
  3. समर्पण :- परिवार का लक्ष्य समर्पण कि भावना होनी चाहिये. समर्पण आपसी हो ओर लक्ष्य केन्द्रित हो. समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा साथ – साथ चलते हैं. घर के अध्यक्ष के परिवार के लिए कुछ लक्ष्य रखे गए हैं. ईश्वर भी जगत में पारिवारिक उद्देश्य रखता है. उद्देश्य समर्पण को निर्धारित करता है.
  4. स्वास्थ्य :- ईश्वर न केवल दैवीय गुण देता है. बलिक दैवीय स्वास्थ्य प्रदान करता है. लेकिन हमें इसके विषय में बेपरवाही नहीं होनी चाहिए. खानपान, रहन-सहन, स्वस्थ, वातावरण स्वस्थ, विचार स्वस्थ, आचार-व्यवहार स्वस्थ हो.
  5. सम्मान :- एक दूसरे को सम्मान दें. घर का मुखिया ईश्वर के समान है जो सभी का लालन-पालन करता है, सुरक्षा देता है. घर कि महिला धरती माता के सामन  पालन करने वाली है. बच्चे घर का भविष्य हैं. वृद्ध घर का अतीत, अनुभवों कि खान हैं. परिवार में सभी का अपना-अपना महत्व है सभी का एक बराबर सम्मान होना चाहिए.
  6. सलाह :- सलाह एवं सम्मति परिवार में हो तो व्यक्ति यहाँ-वहाँ भटकने से बच सकता है. संकट आने पर या जरूरत पड़ने पर हमें सबसे पहले अपने परिवार के लोगों से ही सलाह मशविरा करना चाहिए. जो उचित व उपयुक्त मार्गदर्शन परिवार के लोगों से मिलता है वह शायद बाहर से न मिले. बाहर से मिलने वाली सलाह में कई बार किसी का लालच छिपा रहता है.
  7. सहभागिता :- यदि सहभागिता न हो, आपसी वार्तालाप न हो तो फिर परिवार टूटने लगता है. एक-दुसरे के काम में सहयोग करें. घर का कम केवल महिलाओं का ही नहीं, पुरुषों कि भी इसमें सहयोग करना चाहिए.

 साभार :-पथिक सन्देश