मनोरंजन व टेक्नॉलोजी परिवार से बड़े नहीं

दिंनाक: 28 May 2018 17:00:35


भोपाल(विसंके). देखने में आ रहा है कि आधुनिक टेक्नॉलोजी परिवार में दूरियों का कारण बन रही है. बच्चे पढाई व खेलने के हिस्से का समय कंप्यूटर, वीडीयो गेम्स व मोबाईल पर खर्च कर रहे हैं. युवा ट्विटर, फेसबुक, चैटिंग पर जरूरत से ज्यादा समय दे रहे हैं. जिससे उनके माता.पिता उपेक्षित महसूस कर रहे है. माँ बाप को शिकायत होन लगी है कि मोबाईल पर घंटो बतियाने वाले उनके बच्चों के पास उनसे दो बोल बोलने तक का समय नहीं है. यहां तक कि इसका असर पति व पत्नी के रिश्तों पर भी पड रहा है कहने का भाव कि यह परेशानी शयन कक्ष तक पहुँच चुकी है. फेसबुक पर कुछ लोगों के हजारों मित्र हैं, परंतु पड़ोसी से वे मिलते तक नहीं. इसी तरह आज की पीढी अपना अधिक समय परिवार की बजाय टी.वी. को दे रही है. मित्रों, इसमें कसूर टेक्नॉलोजी का नहीं बल्कि उसको प्रयोग करने वालों का है. कोई भी टेक्नॉलोजी जीवन को सुधारने, उसे सुगम करने के लिए होती है न कि जीवन में परेशानी पैदा करने के लिए. हमें नई से नई टेक्नॉलोजी का प्रयोग करना चाहिए, यह बहुत जरूरी है परंतु विवेक अनुसार इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे हमारे पारिवारिक व सामाजिक रिश्ते कमजोर न होने पाएं. जीवन ऐसा जीएं कि सभी रिश्ते भी निभाए जाएं और टेक्नॉलोजी की दृष्टि से भी आप अपडेट रहें.


 साभारः- पथिक संदेश