आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 28 May 2018 15:59:39


मातृभूमि! तेरे चरणों में पहले ही मैं अपना मन अर्पित कर चुका हूँ। देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है, यह मानकर मैंने तेरी सेवा के माध्यम से भगवान की सेवा की।

            - वीर सावरकर