कब्र में दफनाया जाना मंजूर नहीं तस्लीमा को, मृत्यु पश्चात देहदान का लिया संकल्प

दिंनाक: 12 Jun 2018 15:45:38


भोपाल(विसंके). इस्लाम को खारिज कर चुकी बंगलादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन  एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह अलग है। इस्लाम और कट्टरपंथियों को लेकर अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाली तस्लीमा ने अपनी मृत्यु के बाद अपने शरीर को कब्र में दफनाए जाने से मना कर दिया है। उन्होंने रिसर्च के लिए अपने शरीर को एम्स में मेडिकल के लिए दान देेने का फैसला किया है। तस्लीमा ने अपने ट्विटर हैंडल यह जानकारी दी है।


तस्लीमा ने एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ एनॉटमी की डोनर स्लिप को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, 'मैं मृत्यु के बाद अपना शरीर एम्स को वैज्ञानिक रिसर्च और शिक्षण से जुड़े उद्देश्यों के लिए दान करती हूं।'
तस्लीमा का जन्म 1962 में बंगलादेश में हुआ था। वह पेशे से फिजिशियन हैं। तस्लीमा कई किताबें लिख चुकी हैं। वह नारीवाद और अभिव्यक्ति की आजादी के मुद्दे पर खुलकर लिखती हैं, जिसकी वजह से वह कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। किताब 'लज्जा' की वजह से कट्टरपंथियों ने उनकी मौत पर इनाम तक का एलान कर दिया था, जिसके बाद तस्लीमा बंगलादेश छोड़कर स्वीडन चल गई थीं। 2005 में तस्लीमा भारत आईं और तब से यही रह रही हैं।
इस्लाम पर कई बार उठा चुकी हैं सवाल
2015 में ढाका में एक रेस्टोरेंट पर हुए आतंकी हमले में 20 लोगों की मौत के बाद उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद कीजिए। अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहने वाली तस्लीमा लगातार कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती हैं |
साभार - पान्चजन्य