आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 18 Jun 2018 14:59:55


भोपाल(विसंके). जिस तरह एक प्रज्वलित दीपक के चमकने के लिए दूसरे दीपक की ज़रुरत नहीं होती है।
उसी
तरह आत्मा जो खुद ज्ञान स्वरूप है उसे और क़िसी ज्ञान कि आवश्यकता नही होती है, अपने खुद के ज्ञान के लिए।

- आदि शंकराचार्य