अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाये और उसके महत्त्व को समझे

दिंनाक: 20 Jun 2018 17:41:16


भोपाल(विसंके). हर मानव की इच्छा स्वयं से और पर्यावरण से समरस होकर जीवित रहने की है। तथापि आधुनिक युग में अधिक शारीरिक और भावात्मक इच्छायें लगातार जीवन के अनेक क्षेत्रों पर भारी हो रही हैं। परिणामत: अधिकाधिक व्यक्ति खिंचाव, चिंता, अनिद्रा जैसे शारीरिक और मानसिक तनावों से पीडि़त रहते हैं और शारीरिक सक्रियता और उचित व्यायाम में एक असंतुलन बन गया है। यही कारण है कि स्वस्थ बने रहने और उसमें सुधार के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक समरसता बनाए रखने के लिए नई नई विधियों और तकनीकों का महत्व बढ़ गया है. "योग" शब्द का उद् गम संस्कृत भाषा से है और इसका अर्थ "जोडऩा, एकत्र करना" है। योगिक व्यायामों का एक पवित्र प्रभाव होता है और यह शरीर, मन, चेतना और आत्मा को संतुलित करता है। योग हमें दैनन्दिन की माँगों, समस्याओं और परेशानियों का मुकाबला करने में सहायक होता है। योग स्वयं के बारे में समझ, जीवन का प्रयोजन और ईश्वर से हमारे संबंध की जानकारी विकसित करने के लिए सहायता करता है। आध्यात्मिक पथ पर योग हमको ब्रह्माण्ड के स्व के साथ वैयक्तिक स्व के शाश्वत परमानंद मिलन और सर्वोच्च ज्ञान को प्रशस्त करता है। योग सर्वोच्च ब्रह्मांडमय सिद्धान्त है। यह जीवन का प्रकाश, विश्व की सृजनात्मक चेतना है जो सदैव सजग रहती है और कभी सोती नहीं; जो हमेशा थी, हमेशा है और हमेशा होगी-रहेगी।


हजारों वर्ष पहले भारत में ऋषियों (बुद्धिजीवियों और संतों) ने अपनी ध्यानावस्था में प्रकृति और ब्रह्माण्ड की खोज की थी। उन्होंने भौतिक और आध्यात्मिक शासनों के कानूनों का पता किया था और विश्व में संबंधों की अंतर्दृष्टि प्राप्त की थी। उन्होंने ब्रह्माण्ड के नियमों, प्रकृति के नियम और तत्त्वों, धरती पर जीवन और ब्रह्माण्ड में कार्यरत शक्तियों और ऊर्जाओं-बाह्य संसार और आध्यात्मिक स्तर दोनों पर ही, जांच की थी। पदार्थ और ऊर्जा की एकता, ब्रह्माण्ड का उद् गम और प्राथमिक शक्तियों के प्रभावों का वर्णन और स्पष्टीकरण वेदों में किया गया है। इस ज्ञान का पर्याप्त अंश पुन: खोजा गया और आधुनिक विज्ञान द्वारा उसकी पुष्टि-सत्य अनुभूति की गई है।

इन अनुभवों और अंतर्दृष्टियों से एक अति दूरगामी और योग नाम से ज्ञात प्रणाली प्रारम्भ हुई और उसने हमको शरीरिक स्वास्थ्य, श्वास एकाग्रचित्तता, तनावहीनता और ध्यान के लिए व्यवहारिक अनुदेश दिए हैं। इस पुस्तक में जो अभ्यास प्रस्तुत किए गए हैं, वे पिछले हजारों वर्षों में सत्य सिद्ध हुए हैं और उन्हें लाखों-करोड़ों लोगों ने सहायक एवं लाभदायक पाया है।

''दैनिक जीवन में योग" पद्वति विश्वव्यापी योग केन्द्रों, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों, स्वास्थ्य संस्थाओं, दक्षता और खेलकूद (Fitness & Sports Clubs), पुनस्र्थापन केन्द्रों और स्वास्थ्य विहारों (Health Resorts) में सिखाई जाती है। यह सभी आयु वर्गों के लिए समीचीन, उपयुक्त है -इसके लिए किसी ''करतबी" बुद्धि की आवश्यकता नहीं है और यह अयोग्य, विकलांग, बीमार और स्वास्थ्य लाभ करने वाले सभी व्यक्तियों को योगाभ्यास करने की संभावना प्रदान करती है। इसका नाम स्वयं इस बात का द्योतक है कि योग का प्रयोग "दैनिक जीवन में" किया जा सकता है और किया भी जाना चाहिए।

व्यायाम स्तरों का निर्धारण चिकित्सकों से परामर्श के बाद किए गये हैं और इस प्रकार-कथित नियमों और सावधानियों के पर्यवेक्षण के साथ-किसी भी व्यक्ति द्वारा घर पर स्वतंत्र रूप से अभ्यास किया जा सकता है। "दैनिक जीवन में योग" एक पुण्यप्रदा देने वाली प्रणाली है जिसका अर्थ है कि इसमें न केवल शारीरिक, अपितु मानसिक और आध्यात्मिक पक्षों पर भी विचार किया जा सकता है। सार्थक-सकारात्मक विचार, दृढ़ता, अनुशासन, सर्वोच्च के प्रति अभिविन्यास, प्रार्थना के साथ-साथ दयालुता और समझ, आत्मज्ञान और आत्मानुभूति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

शरीरिक स्वास्थ्य का जीवन में आधारभूत मूल महत्व है। जैसा कि स्विट्जरलैण्ड में जन्मे चिकित्सक, पैरासैलसस ने बहुत ठीक कहा है: "स्वास्थ्य ही सब कुछ नहीं है, किन्तु स्वास्थ्य के बिना सब कुछ शून्य है। "स्वास्थ्य को बनाने और उसको संजोये रखने के लिए शारीरिक व्यायाम, आसन, श्वास व्यायाम (प्राणायाम और तनावहीनता, विश्राम, शिथिलता, आदि) तकनीकें हैं।

"दैनिक जीवन में योग" में श्रेष्ठ आसनों और प्राणायामों को अष्ट स्तरीय प्रणाली में बांधा गया है जिसका प्रारम्भ "सर्वहितासन" (वे आसन व्यायाम जो हर व्यक्ति के लिए लाभदायक हैं) से है। अन्य भाग इस तैयारी स्तर के बाद आते हैं, और जो आसनों और प्राणायामों के अभ्यास से क्रमश: आगे बढ़ते जाते हैं। अनेक विशेष कार्यक्रम आधारभूत व्यायामों से विकसित किये गये हैं-"पीठ दर्द के लिए योग", जोड़ों के लिए योग", "वरिष्ठों के लिए योग", "प्रबन्धकों के लिए योग" और "बच्चों के लिए योग"। अच्छा स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए "दैनिक जीवन में योग" पुस्तक में अन्य महत्वपूर्ण व्यायाम हठयोग" शुद्धिकरण की तकनीक है। इनमें गहरी तनावहीनता योग निद्रा" एकाग्रता व्यायाम (यथा त्राटक) के साथ साथ मुद्राएं और बन्ध (विशेष योग तकनीक) भी सम्मिलित हैं।

अच्छे स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए एक और बड़ा कारक है- वह भोजन जो हम करते हैं। जो कुछ हम खाते हैं वह हमारे शरीर और मन, हमारे स्वभाव और गुण दोनों को ही प्रभावित करता है। संक्षेप में हम जो खाते हैं उसका प्रभाव हमारे अपने अस्तित्व पर होता है। भोजन हमारी शारीरिक ऊर्जा और जीवन शक्ति, हमारे अस्तित्व का स्रोत है। संतुलित और स्वास्थ्यप्रद भोजन में सम्मिलित हैं- अनाज, सब्जियाँ, दालें, फल, मेवे, दूध और दुग्ध पदार्थ साथ ही मधु, अंकुर, सलाद बीज, जड़ी बूटियाँ, मसाले, मूल रूप में या तुरंत तले पकाए हों। जिन भोजनों को परित्याग करना है वे हैं पुरानी बासी, पुन: गरम किये हुए, प्रकृति परिवर्तित खाद्य, मांस, सभी मांस उत्पाद और मछली और अंडे हैं। शराब, निकोटिन और मादक पदार्थों से बचना भी सर्वोत्तम है क्योंकि ये भी हमारे स्वास्थ्य को शीघ्र नष्ट कर देते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यत, हम मन और इंद्रियों को नियंत्रण में रखने की अपेक्षा इनसे ही जीवन में चलते हैं। तथापि, मन पर नियंत्रण करने के लिए हमें इसे आंतरिक विश्लेषण के अधीन लाना चाहिए और इसको शुद्ध करना चाहिए। नकारात्मक विचार और आशंकाएँ हमारे नाड़ी तंत्र में और उसके द्वारा शारीरिक कार्य में एक असंतुलन पैदा करते हैं। यह बहुत सारी बीमारियों और दु:ख का कारण है। विचार की स्पष्टता, आंतरिक स्वतंत्रता, संतोष और एक स्वस्थ आत्मविश्वास, मानसिक कल्याण का आधार है। यही कारण है हम क्रमिक रूप से अपने नकारात्मक गुणों और विचारों का हल करने का यत्न करते हैं और सकारात्मक विचारों और व्यवहारों को विकसित करने का लक्ष्य अपने सम्मुख रखते हैं और तद् नुसार कार्य करते हैं।

"दैनिक जीवन में योग" पुस्तक मानसिक कल्याण प्राप्त करने के लिए असंख्य विधियां प्रस्तुत करती है: मंत्र अभ्यास [1], अभ्यास, नैतिक सिद्धान्तों का पालन, सत्संग करना, मन को शुद्ध और स्वतंत्र करने के लिए प्रेरक ग्रंथों का अध्ययन। आत्मान्वेषण और आत्म ज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपकरण "आत्म मनन ध्यान" आत्म विश्लेषण की चरणबद्ध तकनीक है। इस ध्यान अभ्यास में हम अपने अवचेतन, हमारी इच्छाओं, जटिलताओं, आचरण के प्रकारों और पक्ष-विपक्ष के संपर्क में आते हैं। यह अभ्यास हमको अपनी प्रकृति, स्वभाव तक परिचित करवा देता है। यह तकनीक हमको नकारात्मक गुणों और स्वभाव से दूर करने के योग्य बनाती है और जीवन में समस्याओं के बेहतर ढंग से प्रबंध करने में सहायता करती है।

सामाजिक स्वास्थ्य

सामाजिक स्वास्थ्य, स्वयं अपने अंदर ही खुश होने की और अन्य लोगों की खुशी बनाने, रखने की योग्यता है। इसका अर्थ है अन्य लोगों के साथ वास्तविक संपर्क व समाज में उत्तरदायित्व ग्रहण करना और समाज के हित के लिए कार्य करना। सामाजिक स्वास्थ्य का अर्थ जीवन को इसके संपूर्ण सौंदर्य में अनुभव करना और तनावहीनता में बिताना है।

हमारे युग की बढ़ती हुई समस्याओं में मादक, नशीले पदार्थों का सेवन है। यह सामाजिक बीमारी का एक साफ लक्षण है। "दैनिक जीवन में योग" की प्रणाली इस रोग का शमन या निरोध करने में सहायक हो सकती है और जनता को एक नया, सार्थक उद्देश्य और जीवन में प्रयोजन प्रदान कर सकती है। एक अच्छे, सकारात्मक सत्संग का हमारे मानस पर महान् सत् प्रभाव पड़ता है। क्योंकि ऐसा साहचर्य हमारा व्यक्तित्व और चरित्र को ढालता है और निरूपित करता है। सत्संग आध्यात्मिक विकास में अति महत्व रखता है।

"दैनिक जीवन में योग" का जीवन बिताने का अर्थ अपने स्वयं के लिए और लोगों के लिए कार्य करना है। इसका अर्थ अपने पड़ोसियों के लिए और समाज के लिए मूल्यवान और रचनात्मक कार्य करना, प्रकृति और पर्यावरण को बनाए रखना और विश्व में शांति के लिए कार्य करना है। योग का अभ्यास करने का अर्थ सार्थक सकारात्मक भावना में रहना और सभी मानव जाति के कल्याण के लिए कार्य करने में सक्रिय रहना है।

आध्यात्मिक स्वास्थ्य

आध्यात्मिक जीवन का मुख्य सिद्धांत और मानव जाति का नीति वचन, नियम है:

अहिंसा- परमोधर्म

किसी की हिंसा न करना प्रमुख सिद्धान्त है।

इस नीति वचन का, अहिंसा का सिद्धान्त, विचार, शब्द भावना और कार्य में सन्निहित है। प्रार्थना, ध्यान, मंत्र, सकारात्मक विचार और सहनशीलता आध्यात्मिक स्वास्थ्य उपलब्ध कराते हैं।

मानव को संरक्षक होना चाहिए, विध्वंसक, नाशक नहीं। जिन गुणों से हम वास्तव में मानव बनते हैं वे देने, समझने, और क्षमा करने की योग्यताएं हैं। जीवन के हर रूपों की वैयक्तिकता-पृथकता और स्वाधीनता का जीवन संरक्षण और सम्मान, योग शिक्षाओं का प्रथम अभ्यास है। इस नीति वचन का अनुसरण करने से अत्यधिक सहनशीलता, समझ, पारस्परिक प्रेम, सहायता और दयाभाव विकसित होते हैं - न केवल कुछ व्यक्तियों में, अपितु सभी मानवों, राष्ट्रों, जातियों और धार्मिक विश्वासों, मत-मतांतरों के मध्य भी।

"दैनिक जीवन में योग" का मूल सिद्धान्त स्वतंत्रता है। योग एक धर्म नहीं है- यह आध्यात्मिकता और बुद्धिमत्ता का स्रोत, सभी धर्मों की जड़ है। योग धार्मिक सीमाओं के बंधनों को दूर करता है और एकता का मार्ग दिखाता है।

"दैनिक जीवन में योग" मंत्र योग और क्रिया योग के माध्यम से जीवन पथ के लिए आध्यात्मिक अपेक्षित मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है। धरती पर सर्वाधिक उच्च विकसित जीवनधारी होने के नाते मानव अपनी वास्तविक प्रकृति और आंतरिक स्व- ईश्वर की अनुभूति करने में सक्षम है। योग का आध्यात्मिक लक्ष्य ईश्वर अनुभूति, वैयिक्तकता एवं आत्मा का ईश्वर से मिलन है। यह अनुभूति कि सब अपने मूल रूप में एक ही है और ईश्वर से संबंध रखते हैं, पहला कदम है।

आपके अपने स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में, एक और स्वतंत्र, सुखी जीवन के बारे में निर्णय, आप ही के हाथों में है। दृढ़ निश्चय के साथ नियमित रूप से अभ्यास करें और सफलता निश्चय ही होगी।

मैं सभी योगाभ्यासियों और भविष्य में योग करने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए वृहद् सुख, सफलता, स्वास्थ्य, जीवन में सुव्यवस्था और आनन्द की कामना व ईश्वर की अनुकंपा चाहता हूँ।

साभार:- महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी महेश्वरानंद