योग मानव विकास का पूर्ण विज्ञान है - पू. संत श्री रामस्वरूप

दिंनाक: 21 Jun 2018 16:14:37


भोपाल(विसंके). वैदिक काल से ही पूरे विश्व में भारत का अपना अलग स्थान रहा है। वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को व्यवहारिक दृष्टि से मानने वाले हमारे ऋषि मुनि, पहाड, कन्दराओं, गुफाओं एवं घने जंगलों के बीच बने आश्रमों में सरल सात्विक जीवन-चर्या के साथ योग क्रियाओं एवं शुद्ध जडी बूटियों के सेवन से सौ-सौ वर्ष तक निरोगी रहते थे। महर्षि पतंजलि के अनुसार योग का अर्थ है, ‘‘जोड़ना‘‘ बीच में विदेशी शासको, (मुगल, अंग्रेजों) के शासनकाल में भी हमारे ऋषि मुनियों की योग तपस्या ही थी जो ‘‘ वसुधैव कुटुम्बकम् वाली हमारी भारतीय संस्कृति अजेय रही।


                हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मा. श्री नरेन्द्र दामोदर मोदी जी के अथक प्रयासों से हमारी पुरातन कालीन योग परंपरा को आज से चार वर्श पूर्व विश्वमंच पर स्थान मिला तथा विश्व के सभी देशों की सामूहिक सहमति से 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता मिली। इस समय विश्व के लगभग 192 देश 21 जून को सामूहिक योगाभ्यास करके इस दिन को विश्व योग दिवस के रूप में मनाते हैं।
हमारे धर्म ग्रंथों में भी योग की जो व्याख्या की गयी है, उसमें योग का अर्थ है जीवात्मा का परमात्मा से मिलन अर्थात जिस तरह चीनी व पानी मिलकर एकाकार हो जाते है अर्थात उनका अलग-अलग अस्तित्व नहीं रहता उसी प्रकार योग की अध्यात्मिक क्रिया से साधक परमात्मा के साथ मिलकर एक हो जाता है। ऐसी स्थिति में सभी प्राणियों में ईश्वर का वास दिखता है। 


                योग से हमे अनगिनत लाभ मिलते है, राष्ट्र ऋषि नानाजी को इसकी व्यवहारिक अनुभूति थी। इसीलिये उन्होंने एकात्म मानववाद के चिन्तक पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के स्वप्नों को साकार करने की दृष्टि से दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के विविध प्रकल्पों के माध्यम से सामाजिक पुनर्रचना का जो वीड़ा उठाया, उसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को भी पूरा महत्व देते हुये संस्थान के स्वास्थ्य प्रकल्प आरोग्यधाम में अलग से योग विभाग की स्थापना की जहाँ से प्रेरणा लेकर लोग पूरे क्षेत्र में योग की अलख जगा रहे।


अदृश्य रूप से उस ऋषि की शक्ति से ही, चतुर्थ विश्वयोग दिवस के उपलक्षय में 21 जून 2018 को विशाल जनसमूह ने सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय के खेल प्रांगण में प्रातः 6:00 बजे से 7:00 बजे तक सामूहिक योगाभ्यास कर लघुकुम्भ का दृश्य प्रकट किया। महिला, पुरूष, छात्र-छात्राओं मै अपार उत्साह था दूर दराज के योग पे्रमियों के लिए दीनदयाल शोध संस्थान एवं चित्रकूट के सभी योग पे्रमी संस्थाओं ने निःशुल्क वाहनों की भी व्यवस्था की। देवाहन दीप प्रज्जवलन एवं महापुरूषों के तैल चित्रों पर पुष्पार्पण के साथ विश्व योग दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।


                योगाभ्यास के बाद म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि चित्रकूट की सभी संस्थायें चतुर्थ विष्व योग दिवस पर एक साथ मिलकर राष्ट्रऋषि नानाजी द्वारा स्थापित प्रांगण में सामूहिक योगरूपी महाकुम्भ में भाग लेकर धन्य हो गये है। डा. वी.के. जैन जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग के द्वारा षरीर, मन बुद्धि, आत्मा का समुचित विकास होता है। पूज्य संत श्री रामस्वरूप जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग से आत्मिक षान्ति मिलती है। हमारे मर्यादा पुरूशोत्तम राम एवं जगत जननी मां सीता दो संस्कृति - कृशि संस्कृति, ऋषि संस्कृति की कृतियां है। कृषि से श्रम एवं ऋषि से बुद्धि अर्थात श्रम और बुद्धि का योग है हमारी भारतीय संस्कृति।
चतुर्थ विशाल विश्व योग दिवस चित्रकूट के संयोजक डा. विजय प्रताप सिंह ने चित्रकूट की सभी संस्थाओं एवं मठ-मन्दिरों तथा दीनदयाल शोध संस्थान के लगनशील कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास से इस कार्यक्रम की सफलता में अहम भूमिका निभायी। दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के उपमहा प्रबंधक डा. अनिल जायसवाल जी ने दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव श्री अभय महाजन जी के मार्ग दर्शन में सभी व्यवस्थाओं का कुशलता से निवर्हन किया।