जन्म होते ही परिवार ने ठुकराया, उसी रोशनी से जगमगाया घर

दिंनाक: 22 Jun 2018 17:38:53


भोपाल(विसंके). इंदौर नगर निगम के सफाईकर्मी मनोज धौलपुरे की बेटी रोशनी ने तमाम विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए कामयाबी हासिल की है। 2011 में पुलिस आरक्षक के रूप में चयन होने के बाद अब भोपाल के भौरी स्थित मप्र पुलिस अकादमी में ट्रेनर के रूप में अधिकारियों को प्रशिक्षित कर रही हैं। आत्मविश्वास से लबरेज रौशनी के इरादे चट्टान से भी मजबूत हैं। वह पुलिस विभाग में एक बड़े अधिकारी के रूप में अपने आप को स्थापित करना चाहती है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण घर वाले ने मेरी पढ़ाई आठवीं के बाद बंद कर दी। क्योंकि दो बड़ी बहनों और छोटे भाई की फीस जमा के बाद इतना पैसा नहीं बचता था कि मेरी भी पढ़ाई हो सके। पापा  को जो भी वेतन नगर निगम से मिलता था उसमें फीस जमा करने के साथ ही साथ घर की और जिम्मेदारियां भी थी।

जन्म होते ही शुरू हो गया था समस्या का दौर :

जन्म होते ही हमारी मां को दादा-दादी ने ये कहकर नाना-नानी के यहां भेज दिया कि पहले से दो बेटियां है और अब ये तीसरी कब इसे घर में नहीं रख सकते। दोनों  बड़ी बहने तो पापा के पास ही रही लेकिन मुझे और मां को पांच साल नाना-नानी के घर उज्जैन में रहना पड़ा।

कौर मैडम ने दिया सहारा

एक दिन दविंदर कौर मैडम(जो हमारी दोनों बहनों को कोचिंग पढ़ती थी) ने मुझे बुलाकर पूछा बेटा आप पढ़ाई नहीं करती, तो मैने कहा मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगा इसलिए। पर दूसरे दिन मेरी बहनों ने मैडम का सारी हकीकत बता दी।  उन्होंने कहा की हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण हमारे पिताजी सिर्फ हम दोनों बहनों और भाई की पढ़ाई का खर्च उठा सकते है। इसलिए हमारे पापा ने रोशनी की पढ़ाई बंद कर दी है। सारी कहानी सुनने के बाद मैडम दविंदर कौर ने हमारा एडमीशन एक प्राइवेट स्कूल शारदा बिहार में करा दिया।  पांच साल तक फीस और किताबों का जो भी खर्च आता था उसका भुगतान  मैडम  ही करती थी।

बेसबॉल में जीते 22 नेशनल पदक

पढ़ाई के साथ ही साथ उन्होंने हमें खेल की तरफ मोड़ा। सन 2005 में पहली राज्य स्तरीय बेसबॉल प्रतियोगिता में मेरा चयन हुआ और पहली बार में ही मुझे कैप्टन बना दिया गया। इसके बाद से मैंने कभी पीछे  मुड़कर नहीं देखा और लगातार बेसबॉल में 22 नेशनल पदक जीते है। नौकरी के साथ ही साथ उन्होंने अभी बेसबॉल का अभ्यास करना नहीं छोड़ा है। हां ये बात जरूर है कि वे हर दिन समय नहीं दे पाती है।  सप्ताह में दो या तीन दिन जाकर अभ्यास करती है। उन्होंने कहा कि 2020 में जापान में होने वाले रियो ओलंपिक को लेकर अधिकारियों से बात करेगी अगर ओलंपिक के नियमों के अनुसार कुछ संभावनाएं बनती है तो उसके लिए तैयारी भी करेंगी। अभी ओलंपिक के लिए दो साल का समय है।

पुलिस अधिकारियों को दे रही ट्रेनिंग

सन 2011 मैंने पुलिस भर्ती में शामिल हुई और पहले ही बार में मेरा चयन पुलिस आरक्षक के रूप में हुआ। बड़वानी में पहली पोस्टिंग मिली। यहां तीन साल रहने के बाद में इंदौर पुलिस अकादमी से पुलिस ट्रेनर का कोर्स किया। इसके बाद मुझे पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग देने का पहला मौका इंदौर में ही मिला। इसके बाद मुझे भौरी पुलिस अकादमी में भेजा गया जहां में करीब एक साल से पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग दे रही हूं।