संक्रामक बीमारी हैजा से बचाव, निदान और लक्षण

दिंनाक: 27 Jun 2018 15:23:17


भोपाल(विसंके). हैजा एक संक्रामक बीमारी  है, जो आंतों को प्रभावित करती है और जिसमें पानी की तरह पतले दस्त लग जाते हैं। हैजा का इलाज समय रहते न किया जाए तो व्यक्ति में पानी की कमी  हो जाती है, जिससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। हैजा दूषित पानी पीने या दूषित खाना खाने के कारण फैलता है। ऐसा पानी या खाना जिसमें वाइब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया  मौजूद हो, हैजा का कारण बनता है।


 हैजा ऐसी जगह पर ज्यादा फैलता है जहां, साफ सफाई का अभाव हो, सीवरयुक्त पानी की सप्लाई हो, साग-सब्जी सीवर के पानी में उगाई जा रही हों या किसी का घर नाले आदि के पास स्थित हो। हैजा, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, किसी में भी हो सकता है। गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों में भी इस रोग के होने की आशंका ज्यादा रहती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। हैजा में व्यक्ति के शरीर से पानी के साथ कई जरूरी लवण, सोडियम और पोटेशियम आदि भी निकल जाते हैं, जिससे व्यक्ति के शरीर का रक्त अम्लीय हो जाता है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

  • इनक्यूबेशन पीरियड- (Incubation Period)

 यह समय कुछ घंटों से 5 दिन तक का होता है लेकिन आम तौर पर एक से दो दिनों का ही होता है।

  • इनफेक्टिव पीरियड- (Infective Period)

 जब तक रोगी पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता तथा बैक्टीरिया से मुक्त नहीं होता तब तक इनफेक्टिव पीरियड होता है।

  • इम्यूनाइजेशन- (Immunization)

 इसके तहत हैजा के संक्रमण से बचने के लिए टीका लगाया जाता है। एक बार टीका लगने से 3 से 6 महीने तक संक्रमण से बचाव हो जाता है।

  कारण : 

  • दूषित पानी, भोजन, फल या दूध आदि का प्रयोग करने से।
  • रोगी व्यक्ति के संपर्क में रहने से, मसलन, उसके साथ खाने, उठने-बैठने, उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए कपड़े पहनने, उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए किसी भी सामान को इस्तेमाल करने से।
  • मक्खियां भी हैजा (Haija) फैलने का बड़ा कारण हैं। खुले में की गई शौच या गंदगी पर बैठकर मक्खियां बैक्टीरिया लेकर दूसरी जगहों पर फैला देती हैं, जिससे हैजा फैलता है।
  • खाने को बिना ढके रखना, और उसे खाना।
  • पानी को बिना ढके रखना।
  • कच्चा या अधपका भोजन, खासकर मांस खाना।

  लक्षण : 

  • दस्त एकदम पतले और चावल के पानी जैसे होना
  • दस्त के साथ उल्टियां होना
  • प्रभावित व्यक्ति को अत्यधिक प्यास लगना
  • प्रभावित व्यक्ति को पेशाब कम आना
  • शरीर की मांस पेशियों में ऐंठन होना

  आयुर्वेदिक उपचार : 

  • पेय पदार्थ की मात्रा बढ़ायें। पानी, नींबू पानी, छाछ आदि पीते रहें। • घर पर ओआरएस तैयार करें, इसके लिए चार कप पानी में छह छोटे चम्मच चीनी और आधी छोटी चम्मच नमक मिलाएं और जितना ज्यादा पी सकें, पीएं।
  • दही में केला मिलाकर खाएं।
  • अदरक को कद्दूकस करके शहद के साथ मिलाकर खाएं। यदि शौच में खून के धब्बे आ रहे हों तो अदरक न खाएं।
  • एक गिलास पानी में शहद, नींबू और नमक मिलाकर पियें।
  • 10 से 20 मिलीग्राम जिंक की जरूरत रोज होती है, ऐसे में जिंक के सप्लीमेंट लें।
  • प्याज और काली मिर्च को पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे दिन में तीन बार एक हफ्ते के लिए खाएं।
  • लौंग डालकर पानी को उबालें और छानकर, इस पानी को पीएं।
  • दही में मेथी पाउडर और जीरा पाउडर डालकर खाएं।
  • नींबू के रस में कच्ची हल्दी की जड़ें 2 घंटे के लिए भिगा कर रखें और बाद में पीसकर एक कंटेनर में रख लें। एक कप पानी में इस पेस्ट की कुछ मात्रा को पानी और शहद मिलाकर पीएं।

  बचाव  : 

  हैजा का इलाज करने से पहले रोगी को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना हाहिए। हैजा अकसर साफ-सफाई की कमी के कारण भी फैलता है। हैजा होने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

  • दूषित भोजन, पानी या किसी अन्य खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल न करें
  • बासी भोजन न करें
  • प्रत्येक खाद्य पदार्थ और पानी को हमेशा ढक कर रखें
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • बीमारी हो रही हो तो नींबू की शिकंजी, दही, छाछ, पानी तथा ओआरएस आदि पीते रहें
  • यदि व्यक्ति के दस्त और उल्टी न रूक रहे हों, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं
  • प्रत्येक व्यक्ति को हैजा (Haija) से संबंधित टीका जरूर लगवाना चाहिए
  • रोगी के इस्तेमाल से संबंधित हर चीज को दूसरे लोगों से अलग रखें
  • पानी में फिनाइल डालकर फर्श को साफ करें, ऐसा करने से कीटाणु मर जाते हैं।