अजंता और एलोरा की गुफाएं क्यों प्रसिद्द हैं. ?

दिंनाक: 27 Jun 2018 16:25:17


भोपाल(विसंके). हम में से अधिकतर लोगों ने अजंता और एलोरा की गुफाओं के बारे में सुना ही होगा. ये गुफाएं चट्टानों में से काटे गए. अपने मंदिरों के लिए प्रसिद्द हैं. अजंता की गुफाएं अजंता गाँव के पास हैं, जो महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद नामक स्थान के उत्तर में लगभग 102 किमी की दूरी पर हैं. इसी प्रकार एलोरा की गुफाएं एलोरा गाँव के पास हैं, जो औरंगाबाद के उत्तर-पूर्व में लगभग 29 किमी की दूरी पर स्थित हैं. अजंता के पास रेलवे स्टेशन जलगाँव है. औरंगाबाद का स्टेशन भी बहुत अधिक दूर नहीं है. दर्शकों को इन गुफाओं के पास ठहरने की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. अजंता में लगभग 30 गुफाएं हैं. इन सभी में चट्टानों को काटकर बुद्धकालीन मंदिर बने हुए हैं. ये मंदिर ग्रेनइट चट्टानों को खोखला करके बनाए गए है. ये वगुर्ना नदी की घाटी की 22 मीटर (70फुट) ऊँची पहाड़ी में से काटे गए हैं. इन सभी मंदिरों का निर्माण ई.पू. पहली शताब्दी से ईसा के बाद की 7 वी शताब्दी के बीच किया गया था. ये दो  प्रकार के हैं : चैत्य और विहार. बड़ी गुफाओं में स्तम्भ छत तक जाते हैं. अन्दर की अधिकतर दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित चित्र बने हुए हैं. गुफा नंबर 1, 4, 17, 19, 24, और 26, में पत्थरों से तराशी हुई बहुत ही सुन्दर मूर्तियाँ हैं.


एलोरा में पहाड़ी के साथ-साथ लगभग २ किमी की दूरी तक गुफाएं ही गुफाएं हैं. ये गुफाएं तीन हिस्सों में बंटी हुईं हैं. ये तीन हिस्से, बुद्ध, हिन्दू, तथा जैन धर्म से सम्बंधित हैं. ये सभी ऐतिहासिक क्रम में बनी हैं. कुल मिलाकर 34 मंदिर और विहार हैं. इनका निर्माण चौथी और नवीं शताब्दियों के बीच में हुआ था. इन सबमें कैलाश नाथ का मंदिर बहुत ही सुन्दर और वैभवपूर्ण है. यह 50 मीटर लम्बा तथा 29 मीटर ऊंचा है. यह एक ही चट्टान को को काटकर बनाया गया है. इसमें बहुत ही सुन्दर मूर्तियाँ पत्थरों को तराश कर बनाई गयीं हैं. ये मूर्तियाँ देवी देवताओं की हैं. यहाँ का शिव मंदिर राष्ट्रकूटों के काल में 8 वीं शताब्दी में बनाया गया था. इसमें एक खुला हुआ मंडप भी है, जिसमें हाथियों की विशाल मूर्तियाँ बनी हुईं हैं. यहाँ एक पवित्र बैल भी है, जो शिवाजी की सवारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है. अजंता और एलोरा की गुफाओं को देखने वाले हजारों दर्शक हर वर्ष वहां जाते हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 


 

 

 

 

 

 

 

साभार :- सेवा प्रेरणा