आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 08 Jun 2018 18:34:31


भोपाल(विसंके). मन सृष्टि के विधाता द्वारा मानव-जाति को प्रदान किया गया एक ऐसा उपहार है, जो मनुष्य के परिवर्तनशील जीवन की स्थितियों के अनुसार स्वयं अपना रूप और आकार भी बदल लेता है.


   - वीर सावरकर