आज की अभिव्यक्ति

दिंनाक: 10 Jul 2018 13:53:03


“आगामी वर्षों के लिए हमारा एक ही देवता होगा और वह है अपनी ‘मातृभूमि’ | भारत दूसरे देवताओं को अपने मन में लुप्त हो जाने दो हमारा मातृ रूप केवल यही देवता है जो जाग रहा है | इसके हर जगह हाथ है, हर जगह पैर है, हर जगह काम है, हर विराट की पूजा ही हमारी मुख्य पूजा है | सबसे पहले जिस देवता की पूजा करेंगे वह है हमारा देशवासी | ”


- स्वामी विवेकानन्द