सरसंघचालक जी के साथ रतन टाटा साझा करेंगे मंच

दिंनाक: 11 Jul 2018 16:10:36


मशहूर उद्योगपति रतन टाटा अगले महीने मुंबई में नाना पालकर स्मृति समिति द्वारा आयोजित स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के साथ मंच साझा करेंगे। पिछले दिनों नागपुर में संघ शिक्षा वर्ग के तृतीय वर्ष के समापन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी उपस्थिति रहे थे। उन्होंने संघ के मंच से अपने विचार साझा किए थे। प्रणब दा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को भारत माता का महान सपूत बताया था।
उल्लेखनीय है कि प्रणब दा के नागपुर जाने को लेकर संघ के नाम पर ओछी राजनीति करने करने वाली सेकुलर बिग्रेड में हलचल मच गई थी। बावजूद इसके प्रणब दा संघ के मंच पर पहुंचे थे और अपने विचार रखे थे।

प्रणब दा ने अपने वक्तव्य में कहा था कि हिंदू एक उदार धर्म है। राष्ट्रवाद किसी धर्म व भाषा में बंटा हुआ नहीं है। सहनशीलता हमारी ताकत है। हमारा राष्ट्रवाद कोई एक भाषा , एक धर्म या एक शत्रु से पैदा नहीं हुआ , यह तो सवा अरब लोगों की सदाबहार सार्वभौमिकता का परिणाम है , जो दैनिक जीवन में 122 भाषाएं इस्तेमाल करते हैं। जब यहां आर्य , मंगोल और द्रविड़ सभ्यताओं के लोग एक झंडे के नीचे भारतीय बनकर रहते हैं और कोई किसी का शत्रु नहीं होता , तब हमारा भारत एक राष्ट्र बनता है। संविधान से राष्ट्रवाद की भावना बहती है। विविधिता व सहिष्णुता में ही भारत बसता है।

अब मशहूर उद्योगपति रतन टाटा भी सरसंघचालक के साथ मंच साझा करेंगे। वह नाना पालकर स्मृति समिति द्वारा 24 अगस्त को आयोजित समिति के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान श्री भागवत वहां मौजूद रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री नाना पालकर सतारा में जिला प्रचारक थे। वह रायगढ़ में भी प्रचारक रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन रोगियों एवं जरूरतमंदों के कष्ट निवारण में लगाया। 1967 में उनके असामयिक निधन के बाद 1968 में उनकी सेवाभावना को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए नाना पालकर स्मृति समिति का गठन किया गया। वह एक प्रभावी लेखक और कवि भी थे। संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार का प्रथम अधिकृत जीवन चरित्र उन्होंने ही लिखा था। उनके द्वारा इस्रायल पर लिखी पुस्तक को पढ़कर अनेक यहूदी इस्रायल वापस लौट गए। वहां नाना के नाम पर एक सड़क भी है। उनकी कुछ पुस्तकें भी हैं। इनमें प्रमुख रूप से पू. डॉ. हेडगेवार चरित्र, मंदिराच्या कथा आणि व्यथा, आपली आंघोल, छलाकडून बलाकडे, नानांचे मनघ्गत, खंडो बल्लाल चरित्र, श्री गुरुजी यांची सविस्तार चरित्रे आदि हैं।

रतन टाटा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक श्री भागवत से पहले भी मिल चुके हैं। टाटा दिसंबर 2016 में सरसंघचालक से मिलने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे थे। टाटा समूह का टाटा ट्रस्ट भी विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेता है। नाना पालकर स्मृति का कार्यालय मुंबई स्थित टाटा कैंसर अस्पताल के पास है। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों की देखभाल नाना पालकर स्मृति में की जाती है।