झूठ के पांव नहीं होते, सोशल मीडिया ने अफवाहों को पंख दिये - भरतचन्द्र नायक

दिंनाक: 17 Jul 2018 16:24:42


सोशल मीडिया हब बनाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव ने विपक्ष को विचलित कर दिया है। सर्वोच्च न्यायाल ने इसी तरह की एक यात्रिका विचार के लिए स्वीकृति करते हुए यह कहकर कि सरकार की मंशा निगरानी राज स्थापित करने की लगती है। इसे बहस का मुद्दा बना दिया है। लोकतंत्र में विरोध और बहस से ही जनतंत्र सशक्त और परिपक्व होता है। दरअसल सोशल मीडिया के दुरूपयोग से उत्पन्न स्थिति के परिप्रेक्ष्य में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया हब बनाने का प्रस्ताव किया है। इसी प्रस्ताव पर याचिका के संदर्भ में अदालत ने तल्ख अंदाज में कहा है कि लगता है कि सरकार उपभौकता के वाटसएप संदेश देखना चाहती है। यदि ऐसा सरकार का मंतव्य है तो इजाजत नहीं दी जा सकती है। ऐसा लगता है कि अदालत के संतुष्ट न होने की दशा में केंद्र सरकार की सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब बनाने की योजना खटाई में पड़ सकती है।


       सोशल मीडिया की शक्ति का आज सभी को अहसास अच्छा और बुरा हो चुका है। क्योंकि यह जिन्दगी का अहम हिस्सा बन चुका हैं इसकी संप्रेषण शक्ति बेजोड़ है। सत्यान्वेषण समय साध्य है। लेकिन अफवाहों की उम्र नहीं होती इस मिथक को सोशल मीडिया ने पंख देकर तोड़ दिया है। गलत, आधारहीन सूचना की त्वरित विश्व भर में प्रेषणीयता की सोशल मीडिया की ताकत ने कभी-कभी त्रासद स्थितियां पैदा करने में कसर नहीं छोड़ी है। सोशल मीडिया पर जारी सामग्री दुनिया की विरासत बन जाती है। कभी कभी वह देश के शत्रु के हाथ में हथियार भी बन जाती है। इसलिए सोशल मीडिया के प्लेटफार्म में राजनैतिक दलों का प्रवेश एक अनिवार्यता बन चुकी है। देश में बच्चों को अगवा करने, गाय तस्करी की अफवाहों ने ऐसा कहर वरपाया कि देश विदेश में भी सरकार को बदनामी झेलना पड़ी है। भीड़ हिंसा ने बदनाम किया है। स्वाभाविक रूप से ऐसे गलत हथकंडों से समाज और सरकार की छवि धूमिल हुई है और इसकी रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण पर सहमति अपेक्षित हो गई है। सकारात्मक समाचार सूचना के पलट नकारात्मक खबर समाचार माध्यमों में जल्दी चलती है। कहा जाता है कि खोटे सिक्के की बहुतायत से असल सिक्का चलन से बाहर हो जाता है। इसमें सकारात्मक संशोधन करते-करते यह अपना प्रभाव मन मस्तिष्क पर छोड़ चुकती है जिसका खामियाजा भुगतना पड़ता हैं देश में चार सालों में पांच करोड़ गरीब गरीबी रेखा से ऊंचे उठ गये। यह खबर प्रधानता नहीं पा सकी। जिससे ओझल बन गई। यदि नकारात्मक जानकारी होती तो वह हाॅट केक बन जाती।

       आज भारत की 65 प्रतिशत आबादी युवा है। शिक्षित, अशिक्षित अर्ध शिक्षित सबकी पहुंच सोशल मीडिया तक हैं। समचार पत्रों ने अपनी विश्वनीयता दशकों में बनाई है, लेकिन सोशल मीडिया ऐसा प्लेटफार्म है कि नेट पर सूचना आते ही जेहन में पुलकन पैदा कर देती है। इससे फेक न्यूज भी क्लिक हो जाती है। जिसकी क्षति तो कही न कही होना ही है। फेक खबरें भी विश्वसनीय लगने लगती हैं। इसमें एक खतरा यह अलग से है कि फेक खबर लेखबद्ध दिखाइ्र देती है और हजारों लोग उसे हिट करते दिखाई देते हैं फेक खबरों और अपराधों में लोक रूचि का प्रवृत्त होना भी जोखिमपूर्ण है। इसलिए सावधानी और ऐहतियात अपरिहार्य हो चुका है। सवाल यह है कि सोशल मीडिया की लक्ष्य भेदने की क्षमता एयर स्ट्राइक से त्वरित और प्रभावी होती है। यह स्थिति नीम चढे करेला जैसी बनती है। सोशल मीडिया की ताकत चुनाव की दृष्टि से बेजोड है। अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में सोशल मीडिया ने अपने जौहर दिखाकर दुनिया को दांत तले अंगुली दबाने को विवश कर दिया। गुण दोष की दृष्टि से देखे तो इसका सकारात्मक पहलू भी है। जन जागरूकता विकसित करने में भी इसकी उपयोगिता बेजोड है। जहां तक सोशल मीडिया का भारत में प्रयोग होने की बात है इसकी उपयोगिता सोलहवी लोकसभा के चुनाव में समझी जा चुकी है। भारत में मतदान प्रतिशत बढाने में सोशल मीडिया की भूमिका सभी स्वीकार कर चुके है। सोशल मीडिया जब सकारात्मक लक्ष्य लेकर चलता है तो इसकी सफलता असंदिग्ध होती है। देश में जब निर्भया कांड हुआ सरकार को अपने नियम कानून बदलने के लिए सोशल मीडिया ने ही विवश कर दिया था। लोकप्रियता के विस्तार में इसकी शक्ति का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। वीडियो, आॅडियो से यह काम और भी सहज हो गया है। फेसबुक, व्हाटसएप, इंस्टाग्राम भी सोशल मीडिया के ही विभिन्न मंच है। जिनका उपयोग लोकप्रिय होता जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक इसका प्रचलन तेजी से बढ़ा है।

       सूचना क्रांति ने दुनिया को एक गांव में बदल दिया है। सूचना क्रांति के युग में सोशल मीडिया ने इसका विस्तार किया है। देश की जो आबादी बालिग हो रही है उसे अपने मताधिकार का अवसर 2019 में लोकसभा चुनाव में मिलने जा रहा है। ये सभी राजनैतिक दलों का सुझाव स्वाभाविक है। लोकतंत्र में मतदान के उत्सव में युवा भागीदार बनें इस बात को भारतीय जनता पार्टी ने पूरे उत्साह और ताकत के साथ स्वीकार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस दिशा में सक्रियता और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सक्रियता ने सोशल मीडिया की विधा को कार्यकर्ताओं की रूचि का विषय बना दिया है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चैहान, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री राकेश सिंह और पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत ने पार्टी के सभी 6 मोर्चा और डेढ़ दर्जन प्रकोष्ठों, विभागों में आईटी और सोशल मीडिया की अलग अलग इकाईयां गठित कर उन्हें सक्रियता के साथ राज्य सरकार केन्द्र सरकार उपलब्धियों पार्टी की रीति नीति से जनता को रूबरू करने में जुटा है। सोशल मीडिया में तन्मयता भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की तासीर बन चुकी है। भारतीय जनता पार्टी आईटी और सोशल मीडिया का किस स्तर पर विस्तार हुआ है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा के 6 में से एक मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने जिले में दस-दस विधानसभा क्षेत्र में दस-दस और मंडल स्तर पर पांच पांच आईटी और पांच पांच सोशल मीडिया के कार्यकर्ताओं को इन विधाओं में पारंगत बनाकर उतार दिया है। पिछड़ा वर्ग मोर्चा में 14300 कार्यकर्ता इस विधा में जुट गए है। भोर से लेकर अर्धरात्रि तक इनकी व्यस्तता अफवाहों का खंडन करने और पार्टी सरकार की उपलब्धियों को जन जन को परोसने में व्यतीत हो रहा है।

       भारतीय जनता पार्टी सोशल मीडिया की टीम तीन दिशाओं में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। एक तरफ प्रिंट मीडिया पर ध्यान केन्द्रित हुआ है तो दूसरी तरफ पार्टी और सरकार के विरूद्ध दुष्प्रचार पर नजर रखी जा रही है। वही दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए जवाबी रिपोर्ट तैयार करने और उसे संचार माध्यमों को परोसने का काम हो रहा है। पार्टी के विरूद्ध दुष्प्रचार का जवाब देने की तैयारी मतदान केन्द्र पर की गयी है। मतदान केन्द्र पर तैनात साइबर योद्धा दुष्प्रचार की हवा निकालने के लिए रिपोर्ट तैयार करने में लगा दिए है। तथ्यात्मक जानकारी आंकड़े संग्रह कर रिपोर्ट अग्रेषित करने में जुटे है। इन कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के लिए स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करने की सुविधा सुलभ की जा रही है। चुनावी समर में विपक्ष के दुष्प्रचार को रोकने के लिए हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की तरह तैयारी पुख्ता है।

       भारतीय जनता पार्टी ने नमो एप से भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोडने की जो पहल की है उससे प्रधानमंत्री के दैनंदिन के उदगार से कार्यकर्ता उर्जित हो रहे है। लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर रखते हुए पार्टी ने साइबर विशेषज्ञों की टीम भी क्षेत्रवार तैयार की है जिसका विस्तार किया जा रहा है। आईटी टीम से अपेक्षा की गयी है कि वह एनडीए सरकार की उपलब्धियां जन जन तक पहंुचाने के लिए एक तुलानात्मक अध्ययन जनता के समक्ष पेश करे जिसमें 2004 से 2014 के बीच डाॅ. मनमोहन सिंह सरकार की विफलताओं का ब्योरा देश में भ्रष्टाचार और व्याकुल जनता की अकुलाहट और 2014 से 2018 के बीच देश में हुई प्रगति और आशाओं के संचार की झंाकी होगी। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मो का इस्तेमाल करने के लिए पार्टी के मोर्चा और प्रकोष्ठ अपनी क्षमता का उत्कृष्टता से इस्तेमाल कर जनजीवन के हर क्षेत्र में संवाद और संपर्क में जुट गया है जिससे लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने आईटी और सोशल मीडिया के जरिए चुनाव का शंख फंूक दिया है।